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West Bengal Election: इन 110 सीटों पर एक महीने पहले टेंशन में थीं ममता बनर्जी, अब तस्वीर TMC के फेवर में कैसे, समझिए

West Bengal Election: एक महीने पहले लग रहा था कि 15 साल में पहली बार TMC के अल्पसंख्यक वोट बैंक में गिरावट आ रही है, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। SIR में नाम हटने और AIMIM-AJUP गठबंधन टूटने के बाद मुस्लिम वोट फिर से TMC के पक्ष में एकजुट होते दिख रहे हैं।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Apr 18, 2026 पर 12:26 PM
West Bengal Election: इन 110 सीटों पर एक महीने पहले टेंशन में थीं ममता बनर्जी, अब तस्वीर TMC के फेवर में कैसे, समझिए
फिर TMC की तरफ लौटते अल्पसंख्यक वोटर!

West Bengal Election: एक महीने पहले ऐसा लग रहा था कि 15 साल में पहली बार TMC के अल्पसंख्यक वोट बैंक में गिरावट आ रही है। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। SIR में नाम हटने, बीजेपी के UCC के वादे और AIMIM-AJUP गठबंधन के टूटने के कारण मुस्लिम वोट फिर से TMC के पक्ष में एकजुट होते नजर आ रहे हैं।

मार्च तक छोटे मुस्लिम संगठन, जैसे ISF, AIMIM और हुमायूं कबीर की AJUP, “स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व” बनाने की बात कर रहे थे। वक्फ कानून, OBC आरक्षण और मदरसा भर्ती को लेकर नाराज़गी के कारण ये दल राज्य की लगभग 110 मुस्लिम बहुल सीटों पर TMC के वोट बैंक में सेंध लगाने की स्थिति में दिख रहे थे।

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों और अल्पसंख्यक नेताओं के अनुसार, SIR के दौरान 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए (जिनमें करीब एक-तिहाई मुस्लिम माने जा रहे हैं)। इसके साथ ही AIMIM-AJUP गठबंधन टूट गया, कबीर से जुड़ा कथित स्टिंग वीडियो सामने आया और बीजेपी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का वादा किया-इन सभी कारणों से हालात पूरी तरह बदल गए।

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