West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं को बड़ी राहत देते हुए SIR के द्वारा 'वोटों को हटाए जाने' के खिलाफ नई याचिकाएं दायर करने की अनुमति दे दी है। टीएमसी का दावा है कि कई सीटों पर हार का अंतर उन वोटों से कम है, जिन्हें मतदाता सूची से हटा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान टीएमसी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। टीएमसी का आरोप है कि बंगाल की कम से कम 31 विधानसभा सीटों पर हार-जीत का अंतर उन वोटों की संख्या से कम है, जिन्हें 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के दौरान मतदाता सूची से डिलीट कर दिया गया था।
आपको बता दें कि हाल ही में हुए पश्चिम बेंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में BJP ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है, जबकि TMC केवल 80 सीटों पर सिमट गई है।
60 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम कटे!
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले हुए मतदाता सूची संशोधन (SIR) के बाद बंगाल के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई। यानी करीब 62 लाख नाम लिस्ट से हटा दिए गए।
ममता बनर्जी और विपक्षी दलों का कहना है कि यह एक खास समुदाय (मुस्लिम) और समुदायों (जैसे मतुआ और अन्य हिंदू समूह) को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की सोची-समझी साजिश थी। बीजेपी ने इस अभियान का बचाव करते हुए कहा कि यह मतदाता सूची से 'अवैध' और 'फर्जी' नामों को हटाने की एक पारदर्शी प्रक्रिया थी।
जहां ज्यादा नाम कटे, वहां BJP को फायदा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आंकड़ों का खेल कुछ इस तरह रहा:
हाई डिलीशन सीटें (25,000+ नाम कटे): ऐसी 169 सीटों पर 2021 में TMC ने 128 सीटें जीती थीं। लेकिन 2026 में यहाँ BJP ने 104 सीटें जीत लीं और TMC मात्र 63 पर रह गई।
लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी: जिन 38 सीटों पर सबसे ज्यादा नाम 'डिस्क्रिपेंसी' के आधार पर हटाए गए, वहां TMC की सीटें 34 से घटकर 22 रह गईं।
सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या होगा?
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने ममता बनर्जी की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें नए सिरे से आवेदन करने की छूट दी है। चुनाव आयोग ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि अगर किसी को चुनाव नतीजों पर आपत्ति है, तो उसे 'इलेक्शन पिटीशन' दायर करनी चाहिए।
अब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी इन 31 सीटों पर चुनाव को चुनौती दे सकती हैं, जहां मार्जिन कम और डिलीशन ज्यादा था।