कड़े मुकाबले वाले चुनावों में असली फैसला हमेशा जोर से खुलकर बोलने वाले वोटर नहीं करते, बल्कि वो लोग करते हैं जो चुप रहते हैं। इन्हें ही “साइलेंट वोटर” कहा जाता है। ये वोटर न तो सर्वे में अपनी राय बताते हैं और न ही एग्जिट पोल में खुलकर जवाब देते हैं, लेकिन नतीजों पर इनका बड़ा असर पड़ सकता है।
