HS Phoolka joins BJP: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता एच. एस. फूलका भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। फुल्का बुधवार (1 अप्रैल) को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और अन्य सीनियर नेताओं की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
एच. एस. फूलका ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व किया था। वह 2014 में पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। लेकिन पांच साल बाद 2019 में उन्होंने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी छोड़ दी थी। फूलका ने 2014 का लोकसभा चुनाव पंजाब के लुधियाना से AAP उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।
लेकिन इस चुनाव में वह कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से हार गए थे। बिट्टू अब बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री हैं। साल 2017 में फूलका ने पंजाब की दाखा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील फूलका 2017 में करीब तीन महीने तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की पैरवी करने के लिए यह पद छोड़ दिया। 2017 में उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनावों में दाखा सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने अकाली नेता मनप्रीत सिंह अयाली को हराया था। उन्होंने 2015 में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। फिर जनवरी 2019 में आधिकारिक तौर पर AAP छोड़ दी थी।
उन्होंने कहा था कि राजनीति में आना उनकी एक गलती थी। अब वे पूरी तरह से अपनी कानूनी लड़ाइयों पर ध्यान देना चाहते हैं। फूलका दिल्ली हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट, मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और राजनेता हैं। उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए की गई उनकी अथक लड़ाई के लिए जाना जाता है।
फूलका ने कांग्रेस नेताओं HKL भगत, सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर को इन हत्याओं में उनकी भूमिका के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए सबसे लंबी और सबसे चुनौतीपूर्ण कानूनी लड़ाइयों में से एक का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों को मान्यता देते हुए उन्हें 2019 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया।
1984 दंगों के बाद फूलका ने 1985 में 'सिटिजन्स जस्टिस कमेटी' (CJC) बनाने में मदद की। इस कमेटी ने विभिन्न न्यायिक आयोगों के सामने पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को एक साथ लाया।
उन्होंने 2001 में एक वेबसाइट भी लॉन्च की थी। ताकि दंगों से जुड़े दस्तावेज और जांच के नतीजे आम लोगों तक पहुंच सकें। एक अन्य पत्रकार के साथ मिलकर उन्होंने 'व्हेन ए ट्री शूक दिल्ली' (When a Tree Shook Delhi) किताब भी लिखी। यह 1984 के सिख विरोधी नरसंहार का पहला विस्तृत ब्योरा है।