Womens Reservation Bill 2026: महिलाओं को मिलेगा हक! 33% आरक्षण पर PM मोदी का बड़ा ऐलान, 816 हो जाएंगी लोकसभा की सीटें

Womens Reservation Bill 2026: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले लोकसभा और राज्यसभा के सदन के नेताओं को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सदस्यों से महिला आरक्षण कानून में संशोधनों को पारित करने के लिए एकजुट होने की अपील की है। इस कानून को आधिकारिक रूप से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से जाना जाता है

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 12:24 PM
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Womens Reservation Bill 2026: विपक्ष ने कहा कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण कानून को लेकर जल्दबाजी कर रही है

Womens Reservation Bill 2026: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि महिला आरक्षण कानून को अब लागू करने का समय आ गया है। पीएम मोदी ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले लोकसभा और राज्यसभा के सदन के नेताओं को लिखे पत्र में पीएम मोदी ने सभी सदस्यों से महिला आरक्षण कानून में संशोधनों को पारित करने के लिए एकजुट होने की अपील की है। इस कानून को आधिकारिक रूप से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश भर में उसके सच्चे स्वरूप में लागू करने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में कहा कि यह अनिवार्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ आयोजित किए जाएं।

पीएम मोदी ने कहा, "16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी एक ऐतिहासिक चर्चा होने वाली है। काफी सोच-विचार के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अब समय आ गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरे देश में सही मायने में लागू किया जाए। यह जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और असेंबली चुनाव महिला रिजर्वेशन के साथ कराए जाएं।"


प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, "मैं यह लेटर इसलिए लिख रहा हूं ताकि हम सब एक आवाज में इस अमेंडमेंट को पास कर सकें। यह बहुत अच्छा होगा अगर कई पार्लियामेंट मेंबर पार्लियामेंट में इस विषय पर अपने विचार रखें। यह किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर का पल है।"

PM ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब एक साथ आएंगे और संसद में यह ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करेंगे। जो पार्लियामेंट मेंबर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में योगदान देंगे। उन्हें इस ऐतिहासिक कोशिश का हिस्सा होने पर हमेशा गर्व होगा।"

खड़गे का पलटवार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा है कि राज्यों में चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना इस धारणा को बल देता है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जल्दबाजी कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खड़गे ने इस मांग को दोहराया कि परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। इस परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों से जोड़ा जा रहा है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने पीएम मोदी को शनिवार को लिखे पत्र में कहा, "मुझे अभी-अभी 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र के संबंध में आपका पत्र प्राप्त हुआ है।" खड़गे ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था। उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए।"

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इसके तत्काल कार्यान्वयन के लिए व्यापक सहमति थी। लेकिन फिर भी उन्होंने इसे लागू नहीं किया। उन्होंने कहा, "तब से 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष बैठक बुलाई गई है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है। आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना असंभव होगा।"

उन्होंने कहा, "आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है। हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह सच्चाई के विपरीत है क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा दौर के चुनाव समाप्त होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।"

खड़गे ने कहा कि राज्यों में जारी चुनावों के दौरान विशेष सत्र बुलाना केवल कांग्रेस के इस विश्वास को पुष्ट करता है कि सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए कानून के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों से केंद्र और राज्य दोनों प्रभावित होंगे। यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में सभी दलों और राज्यों की बात सुनी जाए, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों। उन्होंने, "यदि विशेष बैठक का उद्देश्य 'हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना' और 'सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है', जैसा कि आपने पत्र में लिखा है, तो मैं सुझाव दूंगा कि सरकार परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय एक सर्वदलीय बैठक बुलाए।"

543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी लोकसभा की सीटें

संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी गई है। सदन का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है। महिला आरक्षण अधिनियम से लोकसभा में सीट की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान में संशोधन करके लाया गया था। हालांकि, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो पाता।

इसका मतलब यह था कि यदि वर्तमान कानून यथावत रहता है तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी। इसलिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है।

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