भारतीय रसोई में तांबे और पीतल के बर्तनों का खास महत्व होता है। ये बर्तन न केवल भोजन बनाने और परोसने के काम आते हैं, बल्कि घर की परंपरा, संस्कृति और शान को भी दर्शाते हैं। पुराने समय से ही इन धातुओं के बर्तनों का उपयोग स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता रहा है। हालांकि, नियमित इस्तेमाल और हवा के संपर्क में आने के कारण इनकी चमक धीरे-धीरे कम होने लगती है। ऑक्सीकरण की वजह से इनकी सतह पर काले या हरे रंग की परत जम जाती है, जिससे ये बर्तन फीके और पुराने दिखाई देने लगते हैं।
