चुकंदर एक स्वादिष्ट, रंगीन और हेल्थ के लिए बेस्ट सब्जी है। इसकी जड़ को हम सलाद, सब्जी, जूस में उपयोग करते हैं। आप भी शहर में एक अपार्टमेंट में रहते हैं और जगह ना होने के कारण चुंकदर नहीं उगा पा रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है ये काम काफी आसान है।
अगर आपके पास बालकनी या छत है, तो आप गमले में भी आसानी से चुकंदर उगा सकते हैं। इसके लिए आपको जमीन की जरूरत नहीं, बस थोड़ा धैर्य, सही मिट्टी, सूरज की रोशनी और कुछ आसान से स्टेप्स अपनाने होंगे। आइए जानें बालकनी में चुकंदर उगाने का तरीका।
सूबसे पहले चुकंदर की जड़ जमीन के अंदर बढ़ती है, इसलिए गहरा गमला जरूरी है कम से कम 10–12 इंच गहरा । फिर मिट्टी में से पानी बाहर निकालने के लिए गमले में नीचे छेद होना चाहिए ताकि पानी रुके नहीं। मिट्टी से भरे गमले का चयन करें जो मजबूत हो और आसानी से हिलाया जा सके।
आप चाहे तो प्लास्टिक के गमले का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि प्लास्टिक का गमला काफी हल्का होता है और बालकनी के लिए बेहतर होगा।
इसके बाद चुकंदर को हर दिन कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप चाहिए। ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा भी आती हो लेकिन बहुत तेज न हो।अगर ज्यादा धूप नहीं आती तो ग्रो लाइट का प्रयोग कर सकते हैं।
पौधा लगाने के लिए मिट्टी को तैयार करने के लिए 60% गार्डन सॉइल या पॉटिंग मिक्स, 30% खाद, 10% रेत या पर्लाइट ताकि पानी ज्यादा देर न रुके। इसके साथ ही मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए, सख्त मिट्टी में चुकंदर अच्छी तरह नहीं बनता।
चुकंदर के बीज थोड़े कठोर होते हैं, इसलिए उन्हें 6–8 घंटे गुनगुने पानी में भिगो दें। फिर बीज को ½ इंच गहराई पर, 2–3 इंच की दूरी पर मिट्टी में बोएं। ऊपर से हल्की मिट्टी से ढक दें और पानी छिड़कें। बता दें कि बीज के अंदर कई अंकुर हो सकते हैं, इसलिए एक बीज से दो पौधे भी निकल सकते हैं।
इसके बाद पहली सिंचाई बीज बोने के बाद हल्के से करें ताकि मिट्टी गीली हो जाए। रोजाना मिट्टी को चेक करें, ऊपरी 1 इंच गीला रहना चाहिए, लेकिन गीला मतलब पानी भरा न हो। ओवरवॉटरिंग से बचें वरना जड़ें सड़ सकती हैं। सुबह या शाम को ही पानी दें, दोपहर की तेज धूप में न दें।
7–10 दिन में जब अंकुर निकल आएं और 3–4 इंच ऊंचे हो जाएं, तो कमजोर पौधों को निकाल दें । हर पौधे के बीच 3–4 इंच की दूरी पर रखें। इससे हर पौधे को बढ़ने की जगह, पानी और पोषण मिलता है।
हर 2–3 हफ्तों में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या जैविक खाद दें। मिट्टी को ढीला रखें ताकि हवा अंदर जाती रहे। खरपतवार को समय-समय पर हटा दें। आखिरी और अहम बात कि रासायनिक खादों का उपयोग न करें, इससे स्वाद और सेहत दोनों पर असर पड़ता है।
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