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One District One Cuisine: रामपुर के नवाबी दस्तरखान की शान है 'हापसी हलवा', जानें इसकी शाही दास्तान और रेसिपी

One District One Cuisine: रामपुर का 'हापसी हलवा' 200 साल पुराने नवाबी इतिहास और अपनी अद्भुत पौष्टिकता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे अब उत्तर प्रदेश की 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) योजना के तहत वैश्विक पहचान दी जा रही है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड May 09, 2026 पर 7:00 AM
One District One Cuisine: रामपुर के नवाबी दस्तरखान की शान है 'हापसी हलवा', जानें इसकी शाही दास्तान और रेसिपी

उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना के तहत अब रामपुर के मशहूर हापसी हलवे को वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। पीतल नगरी की मुरादाबादी दाल की तरह ही, रामपुर का यह काला हलवा अपनी पौष्टिकता और नवाबी इतिहास के लिए जाना जाता है। योगी सरकार द्वारा घोषित 150 करोड़ रुपये के बजट और 20 लाख रुपये तक के अनुदान से अब रामपुर के इस पारंपरिक जायके को आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ दुनिया भर के बाजारों में उतारा जाएगा।

आइए जानते हैं रामपुर के इस 'ब्लैक डायमंड' यानी हापसी हलवे की दिलचस्प कहानी और इसे घर पर बनाने का तरीका।

हापसी हलवे का शाही इतिहास

हापसी हलवे का इतिहास लगभग 200 साल पुराना है और इसका सीधा संबंध रामपुर की रियासत से है। कहा जाता है कि रामपुर के नवाबों को मीठे का बहुत शौक था, लेकिन वे ऐसा व्यंजन चाहते थे जो स्वाद के साथ-साथ सेहत और मर्दाना ताकत भी बढ़ाए। रामपुर के खानसामों ने दूध, शुद्ध घी और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के मेल से एक ऐसा हलवा तैयार किया जिसे घंटों तक भुना जाता था। अधिक भूनने के कारण इसका रंग गहरा काला या कत्थई हो जाता है, इसी कारण इसे 'हापसी' कहा गया। पुराने समय में रियासत के पहलवान और सिपाही सर्दियों में खुद को गर्म और ऊर्जावान रखने के लिए इसका सेवन करते थे। आज भी रामपुर में कड़ाके की ठंड में हापसी हलवे की मांग सबसे ज्यादा होती है।

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