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Ghosting और Gaslighting से भी खतरनाक है Ghostlighting, जानिए क्या है ये नया डेटिंग ट्रेंड

Ghostlighting: डिजिटल डेटिंग की दुनिया में आजकल ये शब्द काफी चलन में है। ये शब्द है घोस्टलाइटिंग, जो रिश्ते में भरोसे के मायने को सिर्फ बदल ही नहीं रहा, बल्कि उसके साथ खेल रहा है। आइए जानें क्या है इसका मतलब और युवाओं के बीच क्यों बढ़ रहा है इसका चलन

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 25, 2025 पर 7:56 PM
Ghosting और Gaslighting से भी खतरनाक है Ghostlighting, जानिए क्या है ये नया डेटिंग ट्रेंड

आज की डिजिटल डेटिंग की दुनिया में एक शब्द Ghostlighting काफी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। ये सिर्फ शब्द नहीं, एक चलन है जो लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। पहले इस शब्द की बात करते हैं। Ghostlighting शब्द Ghosting और Gaslighting से मिलकर बना है। जाहिर है इसका व्यवहार भी दोनों का मिलाजुला रूप होगा। तो आइए समझते हैं इसकी परिभाषा।

यह तो हम जानते हैं कि आप जिसके साथ रिश्ते में हैं, उसे बिना बताए कहीं चले जाने को घोस्टिंग कहते हैं। इसी तरह दो लोगों के बीच रिश्ते में गलतफहमी या परेशानियों का सारा इल्जाम साथी को देना गैसलाइटिंग कहलाता है। अब बात करते हैं घोस्टलाइटिंग की। मान लीजिए आप जिसको डेट कर रहे हैं, वो अचानक बिना बताए गायब हो जाए और फिर कुछ समय बाद वापस लौट आए। लौटने पर वो ऐसे जताए, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और जो कुछ भी हुआ उसके जिम्मेदार आप हैं। यानी ये घोस्टिंग और गैसलाइटिंग का मिक्स है, जो इन दोनों से कहीं ज्यादा खतरनाक है।

ऐसे में रिश्ते में बंधे लोग न सिर्फ मानसिक प्रताड़ना के शिकार होते हैं, बल्कि उनका खुद पर भरोसा खत्म हो जाता है और धीरे-धीरे हर गलत बात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगते हैं। यह घोस्टिंग से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें गायब होने वाला शख्स सिर्फ संपर्क ही नहीं तोड़ता, बल्कि चालाकी से आपको भावनात्मक तौर से तोड़ता है।

क्या है डेटिंग में घोस्टलाइटिंग?

आज की मॉडर्न डेटिंग दुनिया में घोस्टलाइटिंग का खतरनाक ट्रेंड तेजी से उभरा है। घोस्टिंग और गैसलाइटिंग के मिलेजुले रूप से उभरे इस ट्रेंड में कोई अचानक से बिना किसी संपर्क के एक दिन बस गायब हो जाता है। लेकिन कुछ समय बाद वो वापस लौटता है और गायब होने की बात को पूरी तरह से नकार देता है या इसके लिए अपने पार्टनर को जिम्मदार ठहराता है। ये किसी का सिर्फ खामोश हो जाना भर नहीं है, ये एक खेल है जो बड़ी चालाकी से किसी की भावनाओं के साथ खेला जाता है, जो दुविधा या तनाव बढ़ाता है। घोस्टिंग में लोगों को तकलीफ होती है, लेकिन उन्हें सब खत्म होने की तसल्ली रहती है। मगर घोस्टलाइटिंग में पुराने जख्म फिर से हरे हो जाते हैं। इसके शिकार लोग अपनी याद्दाश्त, भावनाओं और सच पर सवाल उठाने लगते हैं।

घोस्टलाइटिंग तोड़ देता खुद पर भरोसा और भावनात्मक स्थिरता को चोट पहुंचाता है। अचानक किसी का गायब हो जाना और फिर लौट आना, जैसे कुछ हुआ ही न हो, तनाव और खुद पर अविश्वास को बढ़ाता है, जिससे इसके शिकार लोग अपने निष्कर्ष और याद्दाश्त पर शक करने लगते हैं। यह बर्ताव भावनात्मक चालाकी भी हो सकता है, जिसमें लौटने वाला शख्स रिश्ते पर अधिकार या ताकत जमाना चाहता है। इतना ही नहीं घोस्टलाइटिंग झूठी उम्मीद जगाती है, जिससे विक्टिम को लगता है कि रिश्ते को बचाया जा सकता है। अंतत: घोस्टाइटिंग से भरोसे को चोट पहुंचती है, जिसका शिकार विक्टिम भविष्य में किसी पर विश्वास करने से डरता है।

क्यों बढ़ रहा है घोस्टलाइटिंग का चलन ?

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