Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते (Faggan Singh Kulaste) को मंडला जिले की निवास विधानसभा (Niwas Assembly Constituency) से अपना प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया है। वह फिलहाल केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री और मंडला संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद है। उन्हें BJP ने इस बार निवास विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। कुलस्ते बीजेपी के जाने-माने आदिवासी नेता हैं और उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर भी देखा जा रहा है।
निवास का प्रतिनिधित्व वर्तमान में कांग्रेस के डॉ. अशोक मार्सकोले कर रहे हैं, जिन्होंने 2018 का चुनाव 28,000 से अधिक मतों के अंतर से जीता था। वैसे तो यह सीट बीजेपी की गढ़ मानी जाती थी, जहां फग्गन के भाई राम प्यारे कुलस्ते तीन बार विधानसभा का चुनाव जीते थे। लेकिन साल 2018 के चुनाव में यहां पर बड़ा उलटफेर हो गया और कांग्रेस के डॉ. अशोक मर्सकोले ने राम प्यारे को हरा दिया। अब भगवा पार्टी ने इस सीट को वापस अपने पाले में लाने के लिए फग्गन सिंह कुलस्ते को चुनावी मैदान में उतारा है।
कांग्रेस ने साल 1993 और 1998 में इस सीट पर कब्जा किया था। वहीं, 2023 से मैदान पर उतारे गए फग्गन सिंह कुलस्ते ने 1990 में जीत हासिल की थी। निवास विधानसभा सीट पर साल 1957 से 1985 तक 7 विधानसभा चुनाव हुए। इनमें से सिर्फ 1972 में भारतीय जनसंघ और और 1977 में जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। इसके अलावा सभी चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। साल 1990 में बीजेपी ने पहली बार यहां से चुनाव लड़ा और फग्गन सिंह कुलस्ते को उम्मीदवार बनाया। भगवा पार्टी ने इस सीट पर 3,622 वोट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। निवास विधानसभा सीट पर यह बीजेपी की पहली जीत थी। हालांकि, इसके बाद 1993 और 1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने कब्जा कर ली।
BJP के लिए क्यों अहम है यह सीट?
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी 2003 के चुनाव के बाद से लगातार इस सीट पर चुनाव जितती आ रही थी। फग्गन सिंह कुलस्ते के भाई राम प्यारे यहां से तीन बार विधायक रहे। लेकिन 2018 में उन्हे कांग्रेस प्रत्याशी ने 28,000 से अधिक वोटों से हरा दिया। ऐसे में BJP ने इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने के लिए फग्गन सिंह कुलस्ते को चुनावी मैदान में उतारा है।
निवास से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारने का बीजेपी का फैसला महाकौशल क्षेत्र में आदिवासी मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा है। 2018 के विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी ने 84 आदिवासी-बहुल सीटों में से केवल 34 सीटें जीतीं, जो 2013 में उनके पिछले प्रदर्शन से कम थी, जब उन्होंने 59 आदिवासी-बहुल सीटें जीती थीं। 2018 में पार्टी को 25 सीटों का नुकसान हुआ था। इस चुनाव में बीजेपी इस भरपाई को कम करना चाहती है।
1980 से लेकर अब तक के इतिहास
- साल 1980 में कांग्रेस के दलपत सिंह उइके जीते
- 1985 में कांग्रेस के दयाल सिंह
- 1990 में बीजेपी के फग्गन सिंह कुलस्ते
- 1993 में कांग्रेस के दयाल सिंह
- 1998 में कांग्रेस के सुराता सिंह मारवी
- 2003 में बीजेपी के रामप्यारे कुलस्ते
- 2008 में बीजेपी के रामप्यारे कुलस्ते
- 2013 में बीजेपी के रामप्यारे कुलस्ते
- 2018 में कांग्रेस के अशोक मर्सकोले