MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान सियासी दिग्गजों की उम्मीदवारी के कारण चर्चित सीटों में इंदौर-1 भी शामिल है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) को इंदौर-1 सीट से सत्तारूढ़ पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। 67 वर्षीय विजयवर्गीय के चुनावी समर में उतरने के बाद कांग्रेस के कब्जे वाली इस सीट पर पार्टी के मौजूदा विधायक संजय शुक्ला को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है जो एक बार फिर इंदौर-1 से किस्मत आजमा रहे हैं। संजय शुक्ला साल 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान इंदौर के शहरी क्षेत्र की सभी पांच सीटों में कांग्रेस के इकलौते विजयी उम्मीदवार थे। शेष चारों सीटें बीजेपी की झोली में चली गई थीं।
हालांकि, 2022 के पिछले नगर निगम चुनावों में शुक्ला को महापौर पद पर बीजेपी उम्मीदवार पुष्यमित्र भार्गव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। अब विधानसभा चुनाव में शुक्ला का मुकाबला BJP के राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय से है। अपनी रणनीति बदलते हुए शुक्ला अब जातीय समीकरणों को साधने, चुनाव प्रचार के लिए दिग्गज नेताओं को अपने क्षेत्र में लाने और खुद के स्थानीय होने पर विशेष जोर देते हुए विजयवर्गीय को मेहमान बता रहे हैं।
वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले विजयवर्गीय को BJP ने 10 साल के लंबे अंतराल के बाद टिकट दिया है। कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधायक 49 वर्षीय संजय शुक्ला पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। ब्राह्मण समुदाय के शुक्ला इंदौर-1 क्षेत्र के ही मूल निवासी हैं, जबकि विजयवर्गीय इंदौर-2 क्षेत्र के रहने वाले हैं।
40 साल से नहीं हारा कोई चुनाव
खुद को 'हनुमान भक्त' बताने वाले कैलाश विजयवर्गीय ने News18 से बातचीत में कहा, ''शुरुआत में मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता था। मैं सांसद बनकर खुश हूं। लेकिन मैं हनुमान भक्त हूं...इसलिए मैंने पार्टी का आदेश सुना। साथ ही, मैंने सोचा था कि मेरे बेटे को टिकट मिलेगा, लेकिन मेरी पार्टी में 'एक परिवार एक टिकट' का नियम है।" बता दें कि इंदौर-3 सीट से मौजूदा विधायक आकाश विजयवर्गीय को टिकट नहीं दिया गया है। आकाश, कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं।
सार्वजनिक कार्यक्रमों में भजन गाने के अपने शौक के लिए मशहूर विजयवर्गीय इंदौर-1 के तेज विकास और नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के वादों के साथ मतदाताओं का भरोसा जीतने की कवायद में जुटे हैं। विजयवर्गीय अपने 40 साल लम्बे सियासी करियर में अब तक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं। वह इंदौर जिले की अलग-अलग सीटों से 1990 से 2013 के बीच लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 दिसंबर को होगी।
कुल 3.64 लाख मतदाताओं वाले इंदौर-1 क्षेत्र का चुनाव परिणाम तय करने में ब्राह्मण और यादव समुदायों के लोगों की भूमिका चुनाव में अहम रहती है। अनुभवी विजयवर्गीय के अचानक मैदान में उतरने के कारण शुक्ला को इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखने के लिए अपनी चुनावी रणनीति बदलनी पड़ी है। शुक्ला के नजदीकी सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि जातीय समीकरण साधने के लिए कांग्रेस नए सिरे से योजना बना रही है। इसके साथ ही, विपक्ष के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सिलसिलेवार सभाओं की तैयारी भी की जा रही है।
विजयवर्गीय अपनी कुछ टिप्पणियों को लेकर विवादों में रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक रूप से कपड़े न पहनने के लिए महिलाओं को "सूर्पनखा" कहा था। सीएम की महत्वाकांक्षाओं के बारे में उन्होंने न्यूज 18 से कहा, ''एक प्रधानमंत्री है जो चुनाव वाले सभी पांचों राज्यों में चेहरा होगा। मैं शिवराज सिंह चौहान के सीएम बनने के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन अब कोई भी बन सकता है।'' कैलाश विजयवर्गीय ने घोषणा की है कि आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में जिस किसी मतदान केंद्र पर कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा, उनकी पार्टी अपने उस बूथ प्रमुख को 51,000 रुपये का इनाम देगी।