Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) ने विधानसभा चुनाव से खुद को अलग कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान में 23 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर BJP के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के राज्य स्तर के नेताओं पर उन्हें साइडलाइन करने का दबाव डाला। BJP ने राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए अपने 41 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट सोमवार को जारी की, जिसमें 7 मौजूदा सांसदों के नाम भी हैं। इनमें से 6 लोकसभा के, जबकि 1 राज्यसभा का सदस्य है।
हालांकि, पहली लिस्ट में वसुंधरा राजे का नाम नहीं है। इतना ही नहीं राजे के वफादार राजपाल सिंह शेखावत और नरपत सिंह राजवी भी लिस्ट से बाहर हो गए हैं। राजस्थान विधानसभा का कार्यकाल 14 जनवरी, 2024 को समाप्त हो रहा है। 2018 के चुनावों में कांग्रेस ने 100 सीटों के साथ सरकार बनाई थी, जबकि बीजेपी को 73 सीटें मिली थीं।
वसुंधरा राजे के सहयोगी भी दरकिनार!
BJP ने जिन सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने की घोषणा की है उनमें लोकसभा सदस्य नरेंद्र कुमार (मंडावा), दिया कुमारी (विद्याधर नगर), राज्यवर्धन राठौड़ (झोटवाड़ा), भागीरथ चौधरी (किशनगढ़), देवजी पटेल (सांचौर) एवं बालक नाथ (तिजारा) तथा राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा (सवाई माधोपुर) शामिल हैं।
राज्य की विद्याधर नगर सीट से मौजूदा BJP विधायक नरपत सिंह राजवी का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं है। पार्टी ने गुर्जर आंदोलन के अगुवा रहे किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला को देवली उनियारा से उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह पार्टी ने कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया को लक्ष्मणगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया है। जबकि रिटायर्ड IAS अधिकारी चंद्रमोहन मीणा को बस्सी से उम्मीदवार बनाया गया है।
बीजेपी हर वर्ग का रख रही ध्यान
पार्टी की पहली लिस्ट में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 6 सीटों, अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 10 सीटों एवं 25 सामान्य सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। राज्य में कुल 200 सीटें हैं। बीजेपी खेमे के सूत्रों का अनुमान है कि राजे या उनके वफादारों और बीजेपी के पुराने नेताओं को अगली लिस्ट में भी जगह नहीं मिलने वाला है। पार्टी नए चेहरों को चुनावी मैदान में लाएगी।
BJP ने पूर्वी राजस्थान के सवाई माधोपुर से राज्य के सबसे बड़े आदिवासी नेता किरोड़ी लाल मीणा को मैदान में उतारकर समर्थन हासिल करने के लिए राज्य में आदिवासी समुदाय पर भी ध्यान केंद्रित किया है। मीना के मैदान में आने से BJP का लक्ष्य करौली, सवाई माधोपुर, भरतपुर, धौलपुर और दौसा जैसे जिलों में अपना प्रदर्शन सुधारना है, जहां उसने 24 में से केवल एक सीट जीती थी।
राजनीतिक टिप्पणीकार रशीद किदवई का कहना है कि राजस्थान में सांसदों को मैदान में उतारने का भारतीय जनता पार्टी (BJP) का निर्णय राज्य जीतने के प्रति उसके आत्मविश्वास को दर्शाता है। कई सर्वेक्षणों ने भी संकेत दिया है कि पार्टी के सत्ता में आने की अच्छी संभावना है।
किदवई ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने हमलावर रुख अपना लिया है और राजे प्रवाह के साथ चल रही हैं, पार्टी आलाकमान के किसी भी फैसले का मुकाबला करने की कोशिश नहीं कर रही हैं। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक नेता के रूप में उनकी स्थिति खत्म न हो जाए।
पार्टी ने मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही रणनीति लागू की है, जहां मौजूदा विधायकों और पुराने विधायकों की जगह 3 केंद्रीय मंत्रियों और 4 सांसदों को मैदान में उतारा गया है। चुनाव आयोग ने सोमवार को नई दिल्ली में 5 राज्यों में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। इसके अनुसार, राजस्थान राज्य की सभी 200 विधानसभा सीटों के लिए 23 नवंबर को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी।