2025 में भारतीय उद्योग जगत के तीन बड़े विवाद! स्टार्टअप फेल, टाटा में टकराव और अरबों की विरासत पर जंग

Corporate controversies 2025: भारतीय उद्योग जगत 2025 में तीन बड़े विवादों से हिल गया। इसमें मशहूर स्टार्टअप का पतन, देश के सबसे बड़े ग्रुप में सत्ता संघर्ष और दिग्गज उद्योगपति की मौत के बाद अरबों की विरासत को लेकर कानूनी जंग ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े किए। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Dec 21, 2025 पर 10:43 PM
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टाटा ग्रुप भी 2025 में एक बड़े पावर स्ट्रगल का गवाह बना। (सांकेतिक तस्वीर)

Corporate controversies 2025: भारत के कॉरपोरेट गलियारों में 2025 के दौरान कई ऐसे विवाद सामने आए, जिन्होंने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की कमजोरियों को उजागर किया। साल की शुरुआत एक ऐसे स्टार्टअप से हुई, जिसने राइड-हेलिंग बिजनेस के दिग्गजों को चुनौती देने का सपना देखा था, लेकिन कुछ ही समय में उसे अपना ऑपरेशन सस्पेंड करना पड़ा और आखिरकार कंपनी इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया तक पहुंच गई।

एक और बड़ा विवाद देश के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में से एक से जुड़ा रहा, जहां पावर स्ट्रगल के चलते रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले एक व्यक्ति को बाहर का रास्ता दिखाया गया। वहीं, एक तीसरा मामला एक अमीर उद्योगपति की मौत के बाद सामने आया, जिसने उनकी तीसरी पत्नी और पहली शादी से हुए बच्चों के बीच तीखी कानूनी लड़ाई को जन्म दिया। ये बच्चे एक मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री से उनकी पिछली शादी से हैं।

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BluSmart ने ग्राहकों को वह देने का वादा किया था, जो अक्सर दूसरे राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म नहीं दे पाते। आरामदायक कैब, ग्रीन मोबिलिटी और ऐसे ड्राइवर जो आखिरी वक्त पर कैंसिल न करें। अनमोल जग्गी और पुनीत जग्गी की इस कंपनी का मकसद भारत में ग्रीन मोबिलिटी को नई दिशा देना था।

BluSmart के ड्राइवरों को फिक्स सैलरी के साथ मेडिकल इंश्योरेंस जैसे फायदे मिलते थे। वहीं, ग्राहकों को साफ-सुथरी इलेक्ट्रिक कैब्स में आरामदायक सफर का अनुभव मिलता था। अपने पीक पर कंपनी के पास करीब 8,000 कैब्स का फ्लीट था। इनमें से ज्यादातर Gensol Engineering से ली गई थीं। Gensol Engineering एक रिन्यूएबल एनर्जी EPC कंपनी है, जिसे भी जग्गी भाइयों ने ही शुरू किया था।

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अप्रैल में Gensol के प्रमोटर्स पर मार्केट रेगुलेटर SEBI की कार्रवाई हुई। SEBI ने कंपनी में 'आंतरिक नियंत्रण और कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों के पूरी तरह टूटने' का हवाला देते हुए फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए। प्रमोटर्स पर फंड्स के गलत इस्तेमाल के आरोप लगे। इनमें DLF Camellias में एक लग्जरी अपार्टमेंट की खरीद और करीब 26 लाख रुपये के महंगे गोल्फ इक्विपमेंट शामिल थे।

Gensol इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदकर BluSmart को लीज पर देता था। जैसे ही कथित वित्तीय गड़बड़ियां सामने आईं, पूरा ढांचा चरमरा गया और आखिरकार BluSmart को इनसॉल्वेंसी कार्यवाही का सामना करना पड़ा। वहीं, Gensol का स्टॉक अपने पीक से करीब 99% क्रैश कर गया।

टाटा ग्रुप में पावर स्ट्रगल

देश के सबसे पुराने और मजबूत औद्योगिक घरानों में से एक- टाटा ग्रुप भी 2025 में एक बड़े पावर स्ट्रगल का गवाह बना। इस विवाद ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े किए और हालात इतने बिगड़े कि केंद्र सरकार को भी दखल देना पड़ा।

सितंबर में मतभेद उस समय खुलकर सामने आए, जब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व वाले गुट और पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री के नेतृत्व वाले गुट के बीच टकराव हुआ। मिस्त्री और तीन अन्य ट्रस्टियों- झावेरी, खंबाटा और जहांगीर ने मिलकर विजय सिंह को टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा सन्स के बोर्ड से हटाने के पक्ष में वोट दिया। टाटा सन्स, नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक फैले इस विशाल समूह की होल्डिंग कंपनी है।

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विजय सिंह, पूर्व रक्षा सचिव रह चुके हैं। उन्हें नोएल टाटा तथा टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन का करीबी माना जाता है। उनकी विदाई ने टाटा समूह में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया। इससे उस संगठन में गुटबाजी उजागर हुई, जो अब तक सहमति आधारित फैसलों के लिए जाना जाता था।

यह विवाद रतन टाटा के निधन के लगभग एक साल बाद सामने आया। विवाद का केंद्र यह था कि टाटा सन्स बोर्ड में ट्रस्ट्स का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। साथ ही ,शापूरजी पलोनजी ग्रुप के एग्जिट का मुद्दा भी शामिल था, जिसके पास टाटा सन्स में 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

आखिरकार यह बोर्डरूम ड्रामा तब खत्म हुआ, जब मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह रतन टाटा से किए गए अपने उस वादे पर कायम रहना चाहते हैं। इसमें उन्होंने कहा था कि वह टाटा ट्रस्ट्स को ऐसे विवादों में नहीं घसीटेंगे, जो समूह की विरासत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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‘एस्टेट’ को लेकर पारिवारिक जंग

12 जून 2025 को उद्योगपति संजय कपूर की मौत के बाद एक बड़ा पारिवारिक विवाद खड़ा हो गया। उनकी मौजूदा पत्नी प्रिया सचदेव और उनकी पूर्व पत्नी, अभिनेत्री करिश्मा कपूर से हुए बच्चों के बीच उनकी संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।

विवाद की जड़ में एक वसीयत है, जिसे करिश्मा कपूर के बच्चों ने फर्जी बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी है। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने भी उस वसीयत को चुनौती दी है, जिसमें प्रिया सचदेव को करीब 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का उत्तराधिकारी बताया गया है।

करिश्मा कपूर के बच्चे समायरा और कियान ने इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस पारिवारिक संघर्ष में संजय कपूर की बहन मंधिरा भी खुलकर सामने आईं और उन्होंने प्रिया पर आरोप लगाया कि वह पैसे और कानूनी चालों के जरिए परिवार से संपत्ति हथियाने की कोशिश कर रही हैं। मंधिरा ने कहा कि प्रिया कपूर परिवार की विरासत की असली प्रतिनिधि नहीं हैं।

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