गुजरात की जहाज निर्माण कंपनी ABG शिपयार्ड पर देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का आरोप लगा है। कंपनी द्वारा 28 बैंकों के ग्रुप को 22,842 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। इस मामले में जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को कहा कि प्राइवेट शिपिंग फर्म एबीजी शिपयार्ड के बैंक अकाउंट को 2013 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अनुसार नॉन प्रॉफिटेबल एसेट्स यानी NPA (non-profitable assets) घोषित किया गया था और यह तब हुआ था जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी।
केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि बैंक (SBI) की शिकायत के अनुसार NPA 22,842 करोड़ रुपये की है और 2005 और 2012 के बीच ICICI बैंक के नेतृत्व में 28 बैंकों के एक संघ द्वारा अधिकांश अदायगी यानी डिस्बर्समेंट (Disbursement) हुआ और इसमें SBI भी शामिल था। CBI ने 2012 से 2017 तक फर्म के फोरेंसिक ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी को कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेसोलुशन प्रोसेस के लिए ICICI बैंक द्वारा 1 अगस्त, 2017 को अहमदाबाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल को भी भेजा गया था।
एजेंसी ने कहा कि हालांकि, कई बैंकों ने वित्तीय वर्ष 2019-2020 के दौरान एबीजी शिपयार्ड के अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर दिया था। जांच एजेंसी ने मामले दर्ज करने में देरी के पीछे राज्यों द्वारा सामान्य सहमति (general consent) वापस लेने का हवाला दिया। जांच एजेंसी के बयान में कहा गया है कि कुछ राज्यों द्वारा सीबीआई को सामान्य सहमति वापस लेने से बैंक धोखाधड़ी के मामले दर्ज करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया था।
सीबीआई ने अपने बयान में कहा कि DSPE एक्ट की धारा 6 के तहत सामान्य सहमति वापस लेने के कारण 100 से अधिक हाई वैल्यू के बैंक धोखाधड़ी के मामले दर्ज नहीं किए जा सके। आपको बता दें कि महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, केरल और मिजोरम सहित आठ राज्यों ने सीबीआई से सहमति वापस ले ली है। मिजोरम को छोड़कर सभी राज्यों में विपक्षी पार्टियों का शासन है।
CBI ने 12 फरवरी को देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज किया था। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया। यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने भी एबीजी शिपयार्ड कर्ज धोखाधड़ी मामले में पहली रिपोर्ट दर्ज करने में पांच साल का समय लगने का सोमवार को बचाव करते हुए कहा कि धोखाधड़ी का पता लगाने में लगने वाला समय सामान्य से कम ही है। सीतारमण ने कहा कि एबीजी को कर्ज कांग्रेस-नीत यूपीए शासन के दौरान दिया गया था और अकाउंट भी एनपीए 2013 में ही बन गया था। उन्होंने कहा कि सभी बैंकों ने कंपनी को बांटे गए कर्ज का पुनर्गठन मार्च 2014 में किया था लेकिन इसकी वसूली नहीं हो सकी।