Accenture Layoff: 19000 एंप्लॉयीज की छंटनी पर भारत पर क्या होगा असर? हायरिंग को लेकर कंपनी की ये है योजना

Accenture Layoff: मंदी की आशंका के बीच दिग्गज आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) ने डेढ़ साल के भीतर 19 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी का ऐलान किया। इसमें से आधे से अधिक एंप्लॉयीज को 31 अगस्त से पहले निकाल दिया जाएगा। इसका भारतीय एंप्लॉयीज पर भी तगड़ा असर पड़ेगा। जानिए कि कंपनी ने छंटनी का फैसला क्यों किया है। इसके अलावा यह भी जानिए कि हायरिंग फिर कब शुरू होगी-

अपडेटेड Mar 24, 2023 पर 1:45 PM
Accenture ने सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2023 में 8-11 फीसदी रेवेन्यू बढ़ने का अनुमान लगाया था लेकिन अब 8-10 फीसदी का ही अनुमान है। यह आईटी सर्विसेज सेक्टर में दबाव का संकेत है।

Accenture Layoff: मंदी की आशंका के बीच टेक कंपनियों में छंटनी का कोहराम मचा हुआ है। दिग्गज आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) डेढ़ साल के भीतर 19 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी करने की योजना बना रही है। यह इसके कुल वर्कफोर्स का करीब 2.5 फीसदी है। हालांकि भारत में इसका क्या असर पड़ेगा, यह अभी तक तय नहीं है। एक्सेंचर के देश भर में 3 लाख से अधिक एंप्लॉयीज हैं। कंपनी का कहना है कि छंटनी का असर कैसे पड़ेगा, यह मार्केट और देश के हिसाब से अलग-अलग होगा। एक्सेंचर जिन 19 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी करेगी, उसमें से आधे से अधिक तो वे एंप्लॉयीज होंगे जिनका काम क्लाइंट से सीधे नहीं जुड़ा होता है।

Layoff पर कंपनी का कितना होगा खर्च

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी केसी मैकक्लूरे के मुताबिक 19 हजार में से आधे से अधिक एंप्लॉयीज की छंटनी 31 अगस्त से पहले हो जाएगी। कंपनी के इस पर एंप्लॉयी सेवेरेंस और बाकी पर्सनल कॉस्ट्स पर 120 करोड़ डॉलर खर्च होंगे- 50 करोड़ डॉलर वित्त वर्ष 2023 में और 70 करोड़ डॉलर वित्त वर्ष 2024 में। यह 150 करोड़ डॉलर के उस खर्च का हिस्सा है जिसे कंपनी ने वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 में बिजनेस ऑप्टिमाइजेशन के लिए तय किया है। एक्सेंचर का वित्त वर्ष सितंबर-अगस्त का होता है।

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Accenture ने क्यों लिया छंटनी का फैसला

कंपनी ने सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2023 में 8-11 फीसदी रेवेन्यू बढ़ने का अनुमान लगाया था लेकिन अब 8-10 फीसदी का ही अनुमान है। यह आईटी सर्विसेज सेक्टर में दबाव का संकेत है। आईटी सर्विसेज सेक्टर में दबाव इसलिए दिख रहा है क्योंकि क्लाइंट्स कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन पर फोकस बढ़ा रहे हैं और इसके चलते वे खर्च घटा रहे हैं। मैकक्लूरे का कहना है कि कंपनी अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही है और इसके लिए यह स्ट्रक्चरल कॉस्ट्स की स्ट्रैटजी पर चल रही है। उनका कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत तो वेज इंफ्लेशन यानी तेजी से बढ़ती सैलरी को लेकर है जो अब तक कभी नहीं हुई थी।

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हायरिंग को लेकर क्या है कंपनी का प्लान

कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी होने जा रही है, ऐसे में हायरिंग को लेकर क्या प्लान है, इसे लेकर कंपनी की सीईओ जूली स्वीट का कहना है कि इसमें जून-अगस्त 2023 में तेजी दिख सकती है। एक्सेंचर में तिमाही आधार पर दिसंबर 2022- मार्च 2023 में नेट हायरिंग तिमाही आधार पर लगभग फ्लैट रही और 7.38 लाख एंप्लॉयीज रहे। इस दौरान सालाना वालंटरी एट्रीशन 13 फीसदी से गिरकर 12 फीसदी पर आ गया। कंपनी की सीईओ जूली स्वीट के मुताबिक मार्च-मई 2023 में भी हायरिंग लगभग फ्लैट ही रहेगी लेकिन उसके बाद अगली तिमाही यानी जून-अगस्त 2022 में हायरिंग हो सकती है।

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