अब पायलट बनने के लिए किसी ट्रांसजेंडर को मेरी तरह दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा : एडम हैरी

Adam Harry ने कहा कि अगस्त 2020 में मैं मेडिकल टेस्ट के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेश मेडिसिन गया था। वहां जब अधिकारियों को पता चला कि मैं एक ट्रांसजेंडर हूं जो पायलट बनना चाहता हूं तो मुझे काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा

अपडेटेड Aug 18, 2022 पर 4:53 PM
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Adam Harry ने अब दक्षिण अफ्रीका में पायलट की ट्रेनिंग पूरी करने का प्लान बनाया है।

दो साल बाद भी पायलट बनने का सपना देखने वाले पहले ट्रांसजेंडर एडम हैरी (Adam Harry) की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने हाल में गाइडलाइंस जारी की है। इसमें कहा गया है कि पायलट बनने के लिए ट्रांसजेंडर उम्मीदवार के फिटनेस की जांच हर मामले के हिसाब से की जाएगी। इसका मतलब है कि ट्रांसजेंडर्स की फिटनेस की जांच के लिए एक समान मानक नहीं होंगे।

हैरी ने कहा कि इस गाइडलाइंस में कई कमियां हैं। इसलिए उनके लिए दक्षिण अफ्रीका से कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल करना अच्छो रहेगा। लेकिन, उन्हें इस बात की खुशी है कि जैसी दिक्कतों का सामना उन्हें करना पड़ा वैसी दिक्कत का सामना भविष्य में पायलट बनने के लिए दूसरे ट्रांसजेडर को नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि DGCA के बाद सरकार के दूसरे डिपार्टमेंट भी ट्रांसजेंडर लोगों को स्वीकार करने के लिए गाइडलाइंस जारी करेंगे। मेरा मानना है कि अगल कुछ सालों में इंडियन नेवी, एयर फोर्स और दूसरे डिपार्टमेंट में भी इसके लिए नियम बनेंगे।


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हैरी ने स्कूलों के सिलेबस में सेक्सुअलिटी एजुकेशन को शामिल करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों को ट्रांसजेंडर लोगों के बारे में पता नहीं है। अब भी यह ट्रांसजेंडर होने की वजह किसी बीमारी या कमी को माना जाता है। कुछ मेडिकल की किताबों में भी होमोसेक्सुअलिटी को एक विकार (disorder) बताया गया है, जो ठीक नहीं है।

हैरी ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जब हम मेडिकल प्रॉब्लम की वजह से हॉस्पिटल जाते हैं या सरकारी डॉक्युमेंट की जब कॉपी की जरूरत पड़ती है तो हमें हर व्यक्ति को हमारे अंदर आए बदलाव के बारे में बताना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2020 में मैं मेडिकल टेस्ट के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेश मेडिसिन गया था। वहां जब अधिकारियों को यह पता चला कि मैं एक ट्रांसजेंडर हूं जो पायलट बनना चाहता हूं तो मुझे काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा। उस दिन मेरे आंसू निकल गए। मेडिकल टेस्ट्स के बाद मुझे असफल बताया गया और मुझे उड़ान के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।

दोबारा ट्रेनिंग के लिए राजीव गांधी एकैडमी जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि इस एकैडमी ने 2020 में मेरी फीस केरल सरकार को वापस कर दी थी। उड़ान के लिए मुझे योग्य नहीं पाए जाने के बाद उसने ऐसा किया। वह पैसा सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट के पास पड़ा है। मैंने उन्हें जल्द फंड मुझे ट्रांसफर करने के लिए कहा है कि ताकि मैं जोहानसबर्ग में अपना एजुकेशन जारी रख सकूं।

हैरी ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि दक्षिण अफ्रीका में मैं कमर्शियल पायलट की अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लूंगा। उसके बाद मैं काम के लिए इंडिया आउंगा। दक्षिण अफ्रीका में मैं काफी राहत महसूस करूंगा।

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