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AI सीखा हुआ दोहरा सकता है, पर नए सपने नहीं देख सकता: मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी

मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी का कहना है कि तकनीक भले ही तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कभी इंसान की कल्पनाशक्ति की बराबरी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि AI सीखा हुआ दोहरा सकता है, लेकिन नए सपने नहीं देख सकता। अमीश त्रिपाठी ने ये बातें बयान इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित एक विशेष 'फायरसाइड चैट' के दौरान कहीं

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jul 05, 2025 पर 9:46 PM
AI सीखा हुआ दोहरा सकता है, पर नए सपने नहीं देख सकता: मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी
अमीश त्रिपाठी ने बताया कि वह भारतीय माइथोलॉजी पर आधारित "द एज ऑफ भारत" नाम के एक वीडियो गेम पर भी काम कर रहे हैं

मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी का कहना है कि तकनीक भले ही तेजी से आगे बढ़ रही हो, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कभी इंसान की कल्पनाशक्ति की बराबरी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि AI सीखा हुआ दोहरा सकता है, लेकिन नए सपने नहीं देख सकता। अमीश त्रिपाठी ने ये बातें बयान इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित एक विशेष 'फायरसाइड चैट' के दौरान कहीं। इस फायरसाइड चैट का संचालन ICC के चेयरमैन और जिंदल स्टेनलेस के मैनेजिंग डायरेक्टर अभ्युदय जिंदल ने किया। सं

AI की क्षमताओं और सीमाओं पर बोलते हुए त्रिपाठी ने कहा, “AI पहले से ही ट्रांसलेशन और एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में रीयल-टाइम बदलाव ला रहा है। लेकिन AI केवल सीखी हुई चीजों को दोहरा सकता है, यह खुद कोई नया सपना नहीं देख सकता। कल्पना, संवेदना और रचनात्मकता जैसी क्षमताएं अभी भी केवल इंसानों के पास हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में शायद इंसानों को AI नहीं हराएगा, बल्कि एक ऐसा इंसान जो AI के साथ है, वो उस इंसान को हरा देगा जो AI के बिना है।”

अमीश त्रिपाठी अपने 'शिव ट्रायोलॉजी' और 'राम चंद्र सीरीज' की किताबों के लिए दुनिया में प्रसिद्ध हैं और उनकी किताबों की 80 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। इस कार्यक्रम के दौरान अमीश ने अपने साहित्यिक सफर, भारतीय माइथोलॉजी पर आधारित कहानियों, अपने आगामी गेमिंग प्रोजेक्ट को लेकर भी बात की।

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