Air India की Voluntary retirement scheme (VRS) में 4,500 एंप्लॉयीज ने दिलचस्पी दिखाई है। टाटा ग्रुप ने इस साल जनवरी में एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लिया था। अब यह ग्रुप एयर इंडिया की पुरानी साख लौटाने की कोशिश कर रहा है। एक समय एयर इंडिया देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी थी। लेकिन, धीरे-धीरे इसकी वित्तीय सेहत गिरती गई। आखिरकार सरकार ने इसे बेचने का फैसला लिया।
अभी एयर इंडिया का मुकाबला इंडिगो, स्पाइसजेट, गोएयर जैसी एयरलाइंस कंपनियों से है। दिग्गज इनवेस्टर राकेश झुनझुवाला की आकाशा एयर भी जल्द हवाई सेवाएं शुरू करने जा रही है। कई साल के बाद जेट एयरवेज भी ऑपरेशन शुरू करने वाली है।
इस साल की शुरुआत में एयर इंडिया के एंप्लॉयीज की कुल संख्या करीब 13,000 थी। इनमें से 8000 स्थायी एंप्लॉयीज थे और बाकी कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयीज थे। एयर इंडिया का नया मैनेजमेंट कंपनी के एंपलॉयीज में कम उम्र के लोगों की संख्या बढ़ाना चाहता है। इसके अलावा उसका फोकस कॉस्ट घटाने पर भी है। नए मैनजमेंट का मानना है कि एयरलाइंस इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा को देखते हुए बड़े फैसले लेने जरूरी हैं।
एयरइंडिया एयरबस ए350 के साथ बोइंग के नैरो-बॉडी प्लेन खरीदने के बारे में सोच रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरलाइंस इंडस्ट्री में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एयर इंडिया को अपने प्लेन की संख्या बढ़ानी होगी। साथ ही उसे नए रूट पर भी सेवाएं शुरू करनी होगी।
एयर इंडिया ने इस साल जून में पर्मानेंट एंप्लॉयीज के लिए वीआरएस का ऐलान किया था। उसने कहा था कि 40 साल और इससे ज्यादा उम्र के एंप्लॉयी इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। कंपनी ने यह भी कहा था कि 1 जून, 2022 से 31 जुलाई 2022 तक वीआरएस के लिए अप्लाई करने वाले एंप्लॉयीज को एक्स-ग्रेशिया भी मिलेगा। कुल 8000 पर्मानेंट एंप्लॉयीज में वीआरएस में 4500 एंपलॉयीज के अप्लाई करने का मतलब है कि एयरइंडिया के करीब आधे कर्मचारी कंपनी छोड़ देंगे। करीब 4000 कर्मचारी अगले दो साल में रिटायर करने वाले हैं।
टाटा ग्रुप ने इस साल 27 जनवरी को एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। सरकार के साथ एयर इंडिया की 2,700 करोड़ रुपये की डील में यह शर्त थी कि टाटा ग्रुप एक साल के लिए एंप्लॉयीज को नौकरी से नहीं निकेलगा।