Budget 2022: बैंकों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से टैक्स-फ्री फिक्स्ड डिपॉजिट (Tax Freed Fixed Deposit)स्कीम का लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period) घटाने की मांग की है। सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट (Union Budget) पेश करेंगी। बैंकों के एसोसिएशन का मानना है कि टैक्स-फ्री एफडी स्कीम का लॉक-इन पीरियड घटाने से आम लोगों के साथ ही बैंकों को भी काफी फायदा होगा। आइए जानते हैं कि अगर वित्त मंत्री इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की यह डिमांड मान लेती हैं तो आपको क्या फायदा होगा।
इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी (Income Tax Section 80C) के तहत जिन निवेश माध्यमों पर टैक्स छूट मिलती है, उनमें बैंकों की एफडी स्कीम (Bank FD Scheme) भी शामिल है। अभी इसका लॉक-इन पीरियड 5 साल है। इसका मतलब है कि अगर टैक्स बचाने के लिए आप बैंक की टैक्स-फ्री एफडी स्कीम में पैसा डालते हैं तो आप 5 साल पूरे होने से पहले अपना पैसा निकाल नहीं पाएंगे। इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड्स की ईएलएसएस (ELSS) के मुकाबले बैंक एफडी में ज्यादा समय तक पैसा रखने पर ही टैक्स छूट मिलती है।
आईबीए का मानना है कि ईएलएसएस का लॉक-इन पीरियड कम होने से लोग टैक्स-फ्री बैंक एफडी के मुकाबले ईएलएसएस में निवेश करना पसंद करते हैं। ईएलएसएस का लॉक-इन पीरियड सिर्फ 3 साल है। यह सेक्शन 80सी के तहत आने वाली स्कीमों में सबसे कम लॉक-इन है। इस वजह से म्यूचुअल फंड्स की यह स्कीम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। साथ ही इससे मिलने वाला रिटर्न भी अच्छा है।
कई लोग बैंकों में पैसा रखने को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसलिए वे बैंकों की टैक्स-फ्री एफडी स्कीम में निवेश तो करना चाहते हैं, लेकिन इसका ज्यादा लॉक-इन पीरियड उन्हें बड़ी समस्या लगता है। इसलिए अगर वित्तमंत्री आईबीए की मांग मान लेती हैं तो बैंक टैक्स-फ्री एफडी स्कीम का आकर्षण बढ़ जाएगा। लोग टैक्स बचाने के लिए इसका खुलकर इस्तेमाल कर सकेंगे। इसका मतलब है कि अगर आप टैक्स-फ्री एफडी में पैसा रखते हैं तो सिरफ 3 साल के बाद उसे निकाल सकेंगे।
टैक्स-फ्री एफडी स्कीम का लॉक-इन पीरियड घटने से बैंकों को भी फायदा होगा। इससे उनका डिपॉजिट बढ़ेगा। बैंक ग्राहकों से डिपॉजिट के रूप में मिले पैसों को ही लोन के रूप में देते हैं। इस पैसे पर उन्हें ब्याज मिलता है। अगर उन्हें ग्राहकों से सस्ते दर पर डिपॉजिट जुटाने का मौका मिलता है तो उनका प्रॉफिट बढ़ेगा।