Zerodha CEO Nithin Kamath : जिरोधा के सीईओ नितिन कामत की बजट 2022 से उम्मीदों से रिटेल ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स सभी काफी रोमांचित हैं। लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के प्रमुख ने सोमवार को अपनी एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में कमी की पुरानी इच्छा जाहिर की है।
डिलिवरी बेस्ड इक्विटी ट्रेडिंग पर 0.1 फीसदी है एसटीटी
एसटीटी भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड सिक्योरिटीज की खरीद और बिक्री पर वसूला जाने वाला डायरेक्ट टैक्स है। 2016 से, डिलिवरी बेस्ड इक्विटी ट्रेडिंग पर यह 0.1 फीसदी है।
एसटीटी 2004 में पेश किया गया था, जब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) हटा दिया था। जिरोधा पोर्टल पर एक प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, “2018 के बजट में 1 लाख रुपये से ज्यादा के फायदे पर 10 प्रतिशत एलटीसीजी पेश किया गया था, लेकिन एसटीटी में कटौती नहीं की गई।”
सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन टैक्स वाले देशों में है भारत
उन्होंने कहा, “15 से ज्यादा साल से, पहले ट्रेडर के रूप में और अब एक ब्रोकर के रूप में हर बजट डे पर मैं इस उम्मीद से उठता हूं कि एसटीटी हटा दिया जाए या घटा दिया जाए, लेकिन यह सिर्फ बढ़ा ही है। हर एक्टिव ट्रेडर के लिए, एसटीटी की लागत बहुत ज्यादा है। ट्रांजैक्शन टैक्सेज के मामले में, हम दुनिया के कुछ शीर्ष बाजारों में शामिल हैं।”
जिरोधा के कस्टमर सालाना चुकाते हैं 2,500 करोड़ रुपये टैक्स
कामत ने कहा, “सिर्फ जिरोधा के ही कस्टमर एसटीटी, स्टैम्प ड्यूटी और जीएसटी के रूप में सालाना 2,500 करोड़ रुपये का भुगतान करते हैं। कुल मिलाकर, ट्रेडर्स मार्केट से ज्यादा ट्रांजैक्शन कॉस्ट और इम्पैक्ट कॉस्ट में पैसा गंवाते हैं।”
कस्टमर्स के लिए कम ट्रांजैक्शन टैक्स क्यों अच्छा है, इस पर दलील देते हुए निखिल ने कहा कि ट्रांजैक्शन कॉस्ट का भुगतान ट्रेडिंग कैपिटल में से किया जाता है। उन्होंने कहा, “यदि आप इसमें (बिड-आस्क स्प्रेड के कारण गंवाया गया धन) इम्पैक्ट कॉस्ट जोड़ते हैं तो ज्यादातर एक्टिवट ट्रेडर्स मार्केट की तुलना में ज्यादा पैसा ट्रांजैक्शन टैक्स+ इम्पैक्ट कॉस्ट के रूप में गंवाते हैं।”
कामत ने दलील दी कि कम कॉस्ट से कस्टमर्स ज्यादा और लगातार ट्रेड भी कर सकते हैं, जिससे वे ज्यादा रिस्क लेने में सक्षम हो सकते हैं।