अर्थव्यवस्था (Economy) को कोरोना ने बहुत चोट पहुंचाई है। हालांकि, धीरे-धीरे हालात में सुधार आ रहे हैं। अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपनी मंथली रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर का आर्थिक गतिविधियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। फिर भी, जानकारों का मानना है कि अब भी ग्रामीण इलाकों में रोजगार के मौकों का अभाव है। ऐसे में बजट में मनरेगा (MGNREGA) के लिए ज्यादा आवंटन जरूरी है। वित्त मंत्री निर्मला (Nirmala Sitharaman) सीतारमण 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) पेश करेंगी।
मनरेगा के तहत ग्रामीण इलाकों में सरकार लोगों को रोजगार के मौके उपलब्ध कराती है। इस स्कीम का लक्ष्य एक साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करना है। यह स्कीम ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बहुत फायदेमंद रही है। खासकर कोरोना के बाद घर लौटे प्रवासियों (Migrant labourers) को इस योजना से बहुत लाभ हुआ है। साल 2020 में मार्च के आखिर में देशभर में लॉकडाउन लगा था। इसके बाद देश के बड़े शहरों से मजदूरों का पलायन हुआ। रोजगार के मौके खत्म हो जाने से मजदूर अपने घर लौटने को मजबूर हो गए थे। उन्हें मनरेगा के तहत रोजगार मिला था।
माना जा रहा है कि वित्त मंत्री हालात को देखते हुए इस बार बजट में मनरेगा के लिए आवंटन बढ़ाएंगी। पिछले साल 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 73,000 करोड़ रुपये का आवंटन मनरेगा के लिए किया था। बाद में इसमें और 22,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। हालांकि, बजट में शुरुआत में आवंटित रकम वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 61,500 करोड़ रुपये के बजट आवंटन से ज्यादा थी। लेकिन मनरेगा के लिए 1,11,500 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से काफी कम थी।
मनरेगा के ऑफिशियल पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2021-22) के पहले 9 महीनों में 6.6 करोड़ परिवारों को मनरेगा के तहत काम मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान इस स्कीम के तहत कुल 7.55 करोड़ परिवारों को रोजगार मिला था। स्कीम के पोर्टल के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में अब तक इस स्कीम के तहत करीब 9.5 करोड़ लोग काम हासिल कर चुके हैं। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2020-21 में 11.2 करोड़ और वित्त वर्ष 2019-20 में 7.9 करोड़ लोगों को रोजगार मिला था।
इस वित्त वर्ष के लिए मनरेगा के लिए बजट में आवंटित 73,000 करोड़ रुपये दिसंबर तक खर्च हो चुके हैं। इसके बाद सरकार ने अतिरिक्त 22,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इस तरह इस वित्त वर्ष के लिए आवंटित कुल रकम बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये हो गई है।