BUDGET 2022: वित्त मंत्री से बजट में यह ऐलान चाहता है माइक्रोफाइनेंस सेक्टर

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से क्रेडिट गारंटी स्कीम (Credit Guarantee Scheme) की लिमिट बढ़ाने की गुजारिश की है

अपडेटेड Jan 19, 2022 पर 5:59 PM
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माइक्रोफाइनेंस सस्थाओं के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से कहा है कि यह सेक्टर अभी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें फंड की ऊंची लागत शामिल है।

माइक्रोफाइनेंस (Microfinance) तेजी से बढ़ता सेक्टर है। रोजगार (Employment) के मौके उपलब्ध कराने में इस सेक्टर की बड़ी भूमिका है। इस बजट से इस सेक्टर को बहुत उम्मीद है। माइक्रोफाइनेंस सेक्टर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। अगर वित्त मंत्री बजट में इस सेक्टर की उम्मीदें पूरी करती हैं तो इस सेक्टर को बहुत फायदा होगा।

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से क्रेडिट गारंटी स्कीम (Credit Guarantee Scheme) की लिमिट बढ़ाने की गुजारिश की है। माइक्रोफाइनेंस सस्थाओं के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से कहा है कि यह सेक्टर अभी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें फंड की ऊंची लागत शामिल है। फंड की लागत ज्यादा होने से माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को सस्ता दर पर कर्ज मुहैया मुश्किल हो जाता है।

इस सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत मिलने वाले फंड को बढ़ाने की गुजारिश की है। सा-धन के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर पी सतीश ने कहा कि ग्रोथ और खपत बढ़ाने में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की बड़ी भूमिका है। इस वक्त जब अर्थव्यवस्था (Economy) कोरोना की चोट से उबरने की कोशिश कर रही है, इस सेक्टर को सरकार की मदद की जरूरत है।


सतीश ने बताया कि कोरोना की महामारी का काफी असर छोटे माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं की पूंजी पर पड़ा है। इसलिए इस सेक्टर को पांच से सात साल की अवधि के लिए सस्ता फंड मुहैया कराए जाने की जरूरत है। इस सेक्टर के प्रतिनिधियों ने नाबार्ड के तहत 1000 करोड़ रुपये का माइक्रोफाइनेंस डेवलपमेंट फंड बनाने की भी सलाह दी है। इससे उन माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को मदद मिलेगी, जो पूंजी की कमी का सामना कर रही हैं।

माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं ग्रामीण और शहरी इलाकों में कमजोर आय वर्ग के लोगों को अपना रोजगार शुरू करने के लिए लोन देती हैं। ये लोन काफी कम रकम के होते हैं। इस पर लोने लेने वाले लोगों को ब्याज चुकाना पड़ता है। इस सेक्टर में रीपेमेंट का स्तर बहुत अच्छा रहा है। आम तौर पर माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं लोगों को स्वयं-सहायता समूह (Self-Help Group) बनाकर लोन लेने का सलाह देती हैं।

माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं बैंकों और दूसरी वित्तीय संस्थाओं पर फंड के लिए निर्भर करती हैं। उनकी दलील है कि सस्ता फंड मिलने पर ही वे कमजोर आय वर्ग के लोगों को कम ब्याज दर पर लोन दे सकती हैं। कमजोर आय वर्ग के लोग लोन पर ज्यादा ब्याज नहीं चुका सकते। वे लोन की रकम का इस्तेमाल जीविकोपार्ज का साधन बनाने के लिए करते हैं।

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