भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (Micro, Small and Medium Enterprises) के लिए पिछले 5 साल में आसान नहीं रहे है। इस दौरान नोटबंदी, जीएसटी की व्यवस्था लागू होने से आए व्यवधान, बैंकरप्सी कोड के बाद MSME बकाये के भुगतान का प्राथमिकता सूची से हटना और फिर कोरोना महामारी और कमोडिटी की कीमतें बढ़ने जैसी कई चुनौतियां आईं। ऐसे में MSME इंडस्ट्री ने इस बार अपने मांगों की एक पूरी सूची तैयार की है, जिसे वह केंद्रीय बजट 2022 से पूरा होने की उम्मीद कर रहा है।
