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Budget 2022: IBC कानून में संशोधन चाहती हैं MSMEs, ब्याज-सबवेंशन स्कीम के बहाली की भी मांग

MSME सेक्टर ने अपने मांगों की एक पूरी सूची तैयार की है, जिसे वह केंद्रीय बजट 2022 से पूरा होने की उम्मीद कर रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 22, 2021 पर 5:03 PM
Budget 2022: IBC कानून में संशोधन चाहती हैं MSMEs, ब्याज-सबवेंशन स्कीम के बहाली की भी मांग
Micro, Small and Medium Enterprises के लिए पिछले 5 साल में आसान नहीं रहे है

भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (Micro, Small and Medium Enterprises) के लिए पिछले 5 साल में आसान नहीं रहे है। इस दौरान नोटबंदी, जीएसटी की व्यवस्था लागू होने से आए व्यवधान, बैंकरप्सी कोड के बाद MSME बकाये के भुगतान का प्राथमिकता सूची से हटना और फिर कोरोना महामारी और कमोडिटी की कीमतें बढ़ने जैसी कई चुनौतियां आईं। ऐसे में MSME इंडस्ट्री ने इस बार अपने मांगों की एक पूरी सूची तैयार की है, जिसे वह केंद्रीय बजट 2022 से पूरा होने की उम्मीद कर रहा है।

इस लिस्ट में सबसे पहली मांग इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) में संशोधन की है। इंडस्ट्री के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) ने MSMEs कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के बकाए को सुरक्षित करने के लिए इसकी मांग की है।

FISME ने कहा कि, बड़ी कंपनियों/क्लाइंट के रिजॉल्यूशन या नीलामी के समय MSME सप्लायर्स को "ऑपरेशनल क्रेडिटर्स" के रूप में माना जाता है, और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की बकाया राशि की अधिकतर समय बहुत कम या कोई वसूली नहीं होती है।

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