Budget 2022-23 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) अगले वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की नॉमिनल ग्रोथ (GDP Nominal Growth) का अनुमान 12.8 फीसदी रख सकती हैं। अर्थशास्त्रियों ने यह उम्मीद जताई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री (Finance Ministry) वित्त वर्ष 2022-23 के लिए नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 4.8 फीसदी घटा सकती है। निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) पेश करने जा रही हैं।
मनीकंट्रोल ने नॉमिनल ग्रोथ रेट को लेकर 10 अर्थशास्त्रियों के बीच सर्वे किया। अर्थशास्त्रियों ने नॉमिनल ग्रोथ रेट 11.4 फीसदी से 14.5 फीसदी के बीच रहने का अनुमान जताया। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) ने वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी का नॉमिनल ग्रोथ रेट 17.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। यस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील पैन ने कहा, "मेरा मानना है कि बजट में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान करीब 13.5 फीसदी रह सकता है। अगले वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 रहने के अनुमान से ऐसा लगता है।"
पैन ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति की दर लगातार उंचे स्तर पर बनी हुई है। इससे हमें मुद्रास्फीति का करीब 5.5-6 फीसदी अनुमान लगाना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का पिछले महीने जारी प्रोफेशनल फोरकास्टर्स सर्वे के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी 2022-23 के दौरान देश के जीडीपी की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 2021 के बजट में अनुमानित 14.4 फीसदी के मुकाबले 320 बेसिस प्वॉइंट्स अधिक रह सकती है।
अप्रैल-दिसंबर 2021 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति की औसत दर 5.2 फीसदी थी। यह वित्त वर्ष 2020-21 के 6.2 फीसदी के अनुमान के मुकाबले कम है। इस दौरान थोक सूचकांक आथारित मुद्रास्फीति की औसत दर 12.4 फीसदी रही। देश की राष्ट्रीय आय का अनुनमान लगाने के लिए थोक मूल्य सूचकांक का व्यापक इस्तेमाल होता है। बजट में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बहुत मायने रखता है, क्योंकि इससे राजकोषीय घाटा, पूंजीगत खर्च और टैक्स कलेक्शन के सरकार के लक्ष्य तय किए जाते हैं।
नॉमिनल जीडीपी का मतलब क्या है?
किसी एक वित्त वर्ष में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का कैलकुलेशन जब बाजार मूल्य (Market Price) यानी करंट प्राइस पर किया जाता है तो हमें जीडीपी की नॉमिनल वैल्यू मिलती है। यह जीडीपी के वास्तविक मूल्य के मुकाबले ज्यादा होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें महंगाई की वैल्यू शामिल होती है। इससे अलग वास्तविक जीडीपी वैल्यू का कैलकुलेशन स्थिर मूल्य (Constant Price) पर होता है। इसलिए यह आंकड़ा नॉमिनल के मुकाबले कम होता है।