देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ऐसे मोड़ पर है, जिसे दिशा देने के लिए बड़े फैसलों की दरकार है। 1 फरवरी को आने वाला बजट (Budget 2022) इसके लिए एक मौका हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर और आईएमएफ के चीफ इकोनॉमिस्ट रह चुके रघुराम राजन (Raghuram Rajan) का मानना है कि तेज आर्थिक ग्रोथ के लिए पॉलिसी में बदलाव करने की जरूरत है। दरअसल, कोरोना से बेहाल अर्थव्यवस्था के लिए कड़वी दवा जरूरी है।
अंग्रेजी न्यूज चैनल ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने घरेलू अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा के बारे में कई अहम बातें की। उन्होंने कहा कि हमें इंक्रेमेंटल बजटरी पॉलिसी (Incremental Budgetary Policy) के रास्ते पर चलना जल्द बंद करना होगा। इसका मतलब हर साल केंद्रीय बजट में अलग-अलग सेक्टर के लिए प्रस्तावों से है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग और कृषि जैसे सेक्टर के बारे में फिक्र करने की सोच छोड़नी होगी।
राजन का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को लेकर न तो बहुत ज्यादा आशावादी और न ही बहुत निराशावादी होने की जरूरत है। इस वक्त सबसे जरूरी आम लोगों और बाजार का भरोसा बनाए रखना है। दरअसल, पिछले दो साल से कोरोना की महामारी ने अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंचाई है। ऐसे में इकोनॉमी को फिर से ग्रोथ की पटरी पर लाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए सटीक रास्ता तलाशना जरूरी है। यह काम सिर्फ ज्यादा खर्च करने से नहीं होने वाला है।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर का कहना है कि इस वक्त डिमांड बढ़ाने वाले उपायों पर फोकस करना जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकारें इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) को अपनी प्राथमिकता बना सकती हैं। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि राज्य सरकारें जो कर सकती हैं, वह उन्हें करना चाहिए। इसकी वजह यह है कि इससे छोटे रोजगार के मौके पैदा होंगे। इस वक्त इस तरह के रोजगार की बहुत ज्यादा जरूरत है। इसके अलावा स्टील, कॉपर, सीमेंट जैसी चीजों की डिमांड बढ़ाने के भी उपाय जरूरी हैं।"
मनरेगा (Mgnrega) के लिए फंडिंग बढ़ाने पर जोर देते हुए राजन ने कहा कि उन क्षेत्रों पर भी फोकस करना जरूरी है, जिनका अभी प्रदर्शन कमजोर है। हमें टेलीमेडिसीन, टेली लैयरिंग और एडुटेक जैसे नए क्षेत्रों पर जोर देना होगा। इनसे जुड़ी इंडस्ट्री को सिर्फ फंडिंग की जरूरत नहीं है बल्कि उनके लिए डाटा प्रोटेक्शन के बेहतर नियम जरूरी हैं, जो ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर के बारे में सोचने के बजाय सेवाओं (Services) के बारे में सोचना शुरू करना चाहिए, जिनमें काफी दम है।