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बजट 2023 : उर्वरक सब्सिडी में 22 फीसदी की कटौती, 1.75 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का ऐलान

अगले वित्तीय वर्ष के लिए किया गया आवंटन इस वर्ष के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये के फर्टिलाइजर सब्सिडी खर्च के संशोधित अनुमान से कम है। यह अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले अंतिम पूर्ण बजट है। भारत का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Feb 01, 2023 पर 5:55 PM
बजट 2023 : उर्वरक सब्सिडी में 22 फीसदी की कटौती, 1.75 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी को बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का ऐलान किया।

Budget 2023 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी को बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का ऐलान किया। यह घोषणा वित्त वर्ष 2024 के लिए की गई है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए आवंटन इस वर्ष के लिए 2.25 लाख करोड़ रुपये के फर्टिलाइजर सब्सिडी खर्च के संशोधित अनुमान से कम है। इसका मतलब है कि बजट में उर्वरक सब्सिडी में 22 फीसदी की कटौती की गई है। यह अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले अंतिम पूर्ण बजट है। भारत का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।

केंद्र ने FY23 में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा था, लेकिन कृषि पोषक तत्वों की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच आवंटन को बढ़ाकर 2.25 लाख करोड़ रुपये कर दिया। सरकार ने 2021-22 में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर 1.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए थे। सरकार उर्वरक कंपनियों को रिटेल प्राइस तय करने की अनुमति देती है, लेकिन घरेलू किसानों को वैश्विक कीमतों के झटकों से बचाने में मदद करने के लिए कंपनियों को सब्सिडी देती है।

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने पोटाश और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों की सप्लाई को बाधित कर दिया है जो गैर-यूरिया-आधारित मिट्टी पोषक तत्वों के थोक के लिए जिम्मेदार है। भारत उर्वरक के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। देश में कृषि क्षेत्र की उपज को बढ़ावा देने की जरूरत इसलिए है क्योंकि देश के आधे लेबर फोर्स को इससे रोजगार मिलता है और आर्थिक उत्पादन का लगभग 15 फीसदी इसपर निर्भर है। उर्वरक की कीमतों में वृद्धि के बाद सरकार ने पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी स्कीम के तहत दरों को इस तरह किया था कि अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि किसानों को प्रभावित न करे और यह सुनिश्चित हो सके कि पोषक तत्व सस्ते हों।

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