Budget 2023: भारत में वेतन भोगी कर्मचारी सरकार को मिलने वाले रेवेन्यू के सबसे बड़े स्रोत हैं। इसके साथ ही 1 फरवरी को आने वाला आगामी बजट आम चुनाओं के पहले का मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। ऐसे में वित्तमंत्री छूट सीमा (exemption limit)बढ़ाकर और इनवेस्टमेंट पर इंसेंटिव देकर मिडिल क्लॉस को बड़ी राहत दे सकती हैं। राइट होराइजन्स के अनिल रेगो ने ये बातें मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं। इस बातचीत में राइट होराइजन्स के फाउंडर और फंड मैनेजर अनिल रेगो ने आगे कहा कि सरकार वित्तवर्ष 2024 के विनिवेश लक्ष्य को घटाकर 40000 करोड़ रुपए पर ला सकती है। सरकारी कंपनियों की बिक्री करना अपने में एक बहुत बहुत बड़ी चुनौती है। इसके अलावा सरकार 2022 के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब नहीं रही है। ऐसे में वित्तवर्ष 2024 के विनिवेश लक्ष्य को घटाया जा सकता है।
घरेलू इकोनॉमी और खपत से जुड़ी कंपनियों पर लगाएं दांव
बाजार पर बात करते हुए अनिल रेगो ने रहा कि 2023 में चीन और भारत दुनिया के सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाले बाजार रहेंगे। भारत में 2023 में उन कंपनियों में सबसे बेहतर निवेश के मौके बनेंगे जो घरेलू इकोनॉमी से ज्यादा जुड़ी हैं।
बजट में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर होगा फोकस
बजट में कहा रह सकता है फोकस? इस सवाल का जवाब देते हुए अनिल रेगो ने रहा कि बजट 2023 में सरकार को फोकस ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर होगा। इसके चलते आगे हमें इंफ्रा और प्राइवेट सेक्टर में निवेश बढ़ता दिख सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत वर्तमान में ग्लोबल एक्सपोर्ट में केवल 2 फीसदी का योगदान देता है। सरकार एक्पोर्ट बढ़ाने पर फोकस कर रही है। केंद्र सरकार अपनी नीतियों के जरिए देश को दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर दे रही हैं जिससे आगे ऑटोमोबाइल, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे कई सेक्टर्स को फायदा होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जारी रहेगा फोकस
पिछला बजट इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित था। उम्मीद है कि इस बजट में भी ये ट्रेंड जारी रहेगा। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए खपत को बढ़ाने के प्रयास होंगे। इस बजट में रिन्यूएबल एनर्जी में अतिरिक्त निवेश होता दिखेगा। मैन्यूफैक्चरिंग पर सरकार का फोकस बना हुआ है। भारत को सर्विस सेक्टर में कई मामलों में बढ़त हासिल है। ऐसे में सर्विस सेक्टर पर फोकस करने से देश की इकोनॉमी के समग्र विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
डायरेक्ट टैक्स में हो सकता है बदलाव
क्या डायरेक्ट टैक्स में कोई बदलाव हो सकता है? इस सवाल का जवाब देते हुए अनिल ने कहा कि भारत में 80 मिलियन से ज्यादा टैक्सपेयर हैं। वेतनभोगी कर्मचारी टैक्स के जरिए सरकार की कमाई में सबसे ज्यादा योगदान करते हैं। व्यक्तिगत कर दाताओं के लिए बेसिक इनकम टैक्स छूट लिमिट 2.5 लाख है। इसके बढ़ाकर 5 लाख किया जा सकता है। इसके साथ ही 50000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी बढ़ाकर 80000 रुपए किया जा सकता है। इससे देश के मिडिल क्लास को कुछ राहत मिल सकती है।
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