बजट 2023: नई सड़कें बनाने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का फोकस रहा है। BNP Paribas की रिपोर्ट के मुताबिक, रोड सेक्टर में फाइनेंशियल ईयर 2014-15 से 2020-21 के दौरान अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। रोड सेक्टर पर पूंजीगत खर्च की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 20 फीसदी रही है। हाईवेज के मामले में ज्यादा ग्रोथ दिखी है। NHAI की सीएजीआर 35 फीसदी रही है। किलोमीटर के लिहाज से रोड कंस्ट्रक्शन की सीएजीआर 20 फीसदी रही है। पूंजीगत खर्च की ग्रोथ में बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट और बढ़ती लैंड एक्विजिशन कॉस्ट शामिल हैं। रोड सेक्टर में तेज ग्रोथ को बनाए रखने के लिए NHAI को नई पूंजी उपलब्ध करानी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले यूनियन बजट में यह ऐलान कर सकती हैं।
हाईवे कंस्ट्रक्शन के लिए नोडल एजेंसी है NHAI
NHAI रोड बनाने और उसकी मरम्मत से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए नोडल एजेंसी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि एजेंसी ने रोड कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ाने के लिहाज से अच्छा काम किया है। लेकिन, इसकी कुछ कीमत चुकानी पड़ी है। वह है बढ़ता कर्ज। इंडिया में ज्यादातर सड़कें हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनाई जाती हैं। इसमें ट्रैफिक रिस्क डेवलपर पर नहीं होता है, जबकि फंडिंग रिस्क 60 फीसदी पर सीमित होता है। बाकी 40 फीसदी रिस्क NHAI पर होता है।
फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में कर्ज 3.5 लाख करोड़ पहुंचा
पिछले कुछ सालों में NHAI ने रोड कंस्ट्रक्शन के लिए काफी कर्ज लिया है। इसकी वजह यह है कि प्राइवेट सेक्टर की दिलचस्पी इस क्षेत्र में निवेश करने में नहीं रही है। इससे NHAI पर कर्ज बहुत बढ़ गया है। फाइनेंशियल ईयर 2014-15 में यह 0.2 लाख करोड़ था। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में यह बढ़कर 3.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
BNP Paribas के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट नीलेश भैया ने कहा, "फाइनेंशियल ईयर 2023-24 बैलैंसशीट कंसॉलिडेशन का साल होना चाहिए। हमें ग्रोथ फाइनेंशियर ईयर 2024-25 से शुरू होने की उम्मीद है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में एनएचएआई की पूंजी बढ़ाने पर फोकस किया है। इसके लिए बजटीय सहायता बढ़ाने और बाजार से कर्ज नहीं लेने पर जोर है। इसका फायदा मिला है।" सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एनएचएआई के बढ़ते कर्ज का कई बार बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि एनएचएआई कभी कर्ज के जाल में नहीं फंसेगी।
रोड कंस्ट्रक्शन में आई कमी
इस साल अप्रैल-सितंबर में हाईवे कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी गिरकर रोजाना 19.44 किलोमीटर पर आ गई। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में यह 28.64 किलोमीटर थी। हालांकि, इस दौरान कोरोना की महामारी थी। साथ ही मानसून की बारिश देर तक जारी रहने से निर्माण गतिविधियों पर असर पड़ा था।
कर्ज के साथ ही इंटरेस्ट पर बढ़ते खर्च और लैंड एक्विजिशन की ज्यादा कॉस्ट का असर भी एनएचएआई पर पड़ा है। लैंड एक्विजिशन एक्ट में संशोधन की वजह से इस पर आने वाला खर्च फाइनेंशियल ईयर 2013-20 के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा बढ़ा है। यह तब 80 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर था। फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में यह 400 लाख हो गया है।
रोड कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर दिख रहा असर
भैया ने कहा, "लैंड एक्विजिशन और प्रोजेक्ट एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट एक्सपेंडिचर का संबंध सड़क परियोजनाओं के निर्माण से है। इसका स्वागत है। लेकिन, लैंड एक्विजिशन कॉस्ट चिंता का विषय है।" सड़क क्षेत्र में पूंजीगत खर्च बढ़ने की सुस्त रफ्तार का असर रोड सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखने लगा है। इस साल दिलीप बिल्डकॉन और HF Infra जैसी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। हालांकि, IRB Infra और HCC के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। लेकिन, इनके लिए भी संभावनाएं अच्छी नहीं दिख रहीं।