Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण छठी बार बजट पेश करने जा रही हैं। पहली बार उन्होंने जुलाई 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद बजट पेश किया था। ऐसा करने वाली पहली पूर्णकालिक वित्त मंत्री बन गईं। इससे पहले इंदिरा गांधी ने भी बजट पेश किया था लेकिन उन्होंने कार्यवाहक वित्त मंत्री के तौर पर ही बजट पेश किया था। निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करेंगी। चूंकि यह चुनावी वर्ष होगा तो पूरे साल की बजाय यह अंतरिम बजट होगा। चुनावी वर्ष में अंतरिम बजट इसलिए पेश किया जाता है ताकि चुनाव के बाद जिसे सरकार बनाने की कमान मिले, वह सरकार बनाने के बाद बचे हुए महीनों के लेखा-जोखा तैयार करे। बजट से जुड़ी दस दिलचस्प जानकारियां नीचे दी जा रही हैं।
Budget से जुड़े दिलचस्प तथ्य
आरके शनमुखम चेट्टी (RK Shanmukham Chetty) ने 26 नवंबर, 1947 को स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट पेश किया। वह देश के पहले वित्त मंत्री थे। चेट्टी इससे पहले एक उद्योगपति, कोचीन राज्य के पूर्व दीवान और चैंबर ऑफ प्रिंसेस के संवैधानिक सलाहकार थे। वह ब्रिटिश समर्थक जस्टिस पार्टी के सदस्य रहे थे।
आजादी के पहले की भी बात करें तो देश के पहला बजट का ऐलान 7 अप्रैल, 1860 को किया गया था। इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के जेम्स विल्सन ने ब्रिटिश क्राउन को प्रस्तुत किया था। विल्सन भारतीय वायसराय को सलाह देने वाली भारतीय काउंसिल के फाइनेंस मेंबर थे। वह स्कॉटलैंड के कारोबारी, इकनॉमिस्ट और पॉलिटिशयन थे। उन्होंने द इकोनॉमिस्ट और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की स्थापना की थी।
सबसे अधिक बजट मोरारजी देसाई ने पेश किया। उन्होंने 10 बार बजट पेश किया। उन्होंने 1959-60 से 1963-64 तक हर साल के लिए सालाना बजट और 1962-63 के लिए अंतरिम बजट पेश किया। 1967-68 और 1969-70 के बीच तीन साल के लिए सालाना बजट और 1967-68 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था। इसमें से दो बार तो उन्होंने अपने जन्मदिन 29 फरवरी को बजट पेश किया था, 1964 और 1968 में।
रेल बजट को पहल आम बजट से अलग पेश किया जाता था। पहली बार इसे 1924 में अलग से पेश किया गया था। स्वतंत्र भारत में रेलवे का पहला अंतरिम बजट जॉन मथाई ने पेश किया था। जगजीवन राम ने 7 बार, सबसे अधिक बार इसे पेश किया था और पहली बार ममता बनर्जी ने महिला रेल मंत्री के तौर पर 2000 में इसे पेश किया था। करीब छह साल पहले 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया गया। आखिरी बार इसे तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 25 फरवरी 2016 को पेश किया था।
प्रधानमंत्री रहते हुए सिर्फ जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने बजट पेश किया है। मोरारजी देसाई भी प्रधानमंत्री रह चुके हैं और बजट भी पेश किया है लेकिन उन्होंने प्रधानंत्री पद पर रहते हुए कभी बजट नहीं पेश किया था। तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णाचारी के इस्तीफे के बाद नेहरु ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला था और 1958-59 का बजट पेश किया था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के इस्तीफे के चलते वित्त मंत्री का पदभार संभला और वह पहली महिला वित्त मंत्री बनी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए 1970-71 का बजट पेश किया था। इसके बाद राजीव गांधी ने वीपी सिंह के सरकार से बाहर होने के बाद वित्त वर्ष 1987-88 का आम बजट पेश किया था।
1999 तक केंद्रीय बजट की घोषणा फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर शाम 5 बजे की जाती थी। यह ब्रिटिश व्यवस्था के मुताबिक ही था क्योंकि यहां शाम के 5 बजे का मतलब वहां दोपहर का समय होता है। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर अपने यहां के सुबह 11 बजे कर दिया।
वर्ष 2016 तक केंद्रीय बजट फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर पेश किया जाता था। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017 में इसे बदलकर 1 फरवरी कर दिया।
बजट को लेकर कोई भी जानकारी लीक न होने पाए। इसके लिए हलवा समारोह के बाद बजट पेश होने तक इसमें शामिल लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता है। वर्ष 1950 में केंद्रीय बजट लीक हो गया था। उस समय तक बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी। लीक होने के बाद इसे नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित एक प्रेस में स्थानांतरित करना पड़ा। 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में सेट अप कर दिया गया।
पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के रूप में 1991 में शब्दों की संख्या के मामले में सबसे लंबा बजट भाषण दिया था। वहीं समय के हिसाब से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सबसे लंबा बजट भाषण दिया था। उन्होंने केंद्रीय बजट 2020 पेश करते समय 2.42 घंटे तक भाषण दिया था।
1 फरवरी 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार पेपरलेस यानी डिजिटल बजट पेश किया था। कोरोना महामारी के चलते यह अहम बदलाव आया था।