Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इस बार किसानों पर भी मेहरबान दिखी हैं। उन्होंने एग्रीकल्चर क्रेडिट के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इसका मतलब है कि किसानों को कर्ज देने के लिए सरकार बैंकों को 20 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। सरकार का मानना है कि किसान अगर खेती में अच्छा निवेश करेंगे तो उत्पादकता बढ़ेगी। इससे पहले कभी कृषि कर्ज के लिए इतनी बड़ी रकम का आवंटन नहीं किया गया था। पिछले बजट में सरकार ने कृषि कर्ज के लिए 18.5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था। कृषि कर्ज के लिए आवंटन बढ़ने से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। इससे किसानों को इनकम भी ज्यादा होगी।
कृषि क्षेत्र का शानदार प्रदर्शन
निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा, "पशुपालन, डेयरी और फिशरीज को ध्यान में रख एग्रीकल्चर क्रेडिट के लिए आवंटन बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया जा रहा है।" कृषि कर्ज के लिए आवंटन बढ़ने की उम्मीद पहले से की जा रही थी। दरअसल, पिछले पांच-छह सालों में कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। कोरोना की महामारी के दौरान जब इकोनॉमी के सभी सेक्टर की हालत खराब थी तब भी कृषि सेक्टर ने अच्छी ग्रोथ दिखाई थी। रोजगार देने में यह दूसरे सेक्टर से बहुत आगे हैं।
हर साल टारगेट से ज्यादा रहता है एग्री क्रेडिट
इकोनॉमिक सर्वे 2023 के मुताबिक, सरकार कृषि कर्ज के लिए जितना टारगेट तय करती है, उसके मुकाबले वास्तविक आंकड़ा ज्यादा रहता है। सर्वे में कहा गया है कि किसानों को कम इंटरेस्ट रेट पर कर्ज उपलब्ध कराना इस सरकार की प्राथमिकता रही है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की मदद से किसान किसी वक्त कर्ज की जरूरतें पूरी कर सकते हैं।
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ग्रीकल्चर एक्सीलरेटर फंड बनाने का भी ऐलान
सरकार ने बजट में एग्रीकल्चर एक्सीलरेटर फंड बनाने का भी ऐलान किया है। इससे ग्रामीण इलाकों में एग्री-स्टार्टअप शुरू करने के लिए युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस फंड से उन मसलों के समाधान के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ली जाएगी, जिनका सामना किसानों को करना पड़ता है। इससे कृषि कार्यों में भी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
जलवायु परिवर्तन का फसलों पर खराब असर
इंडिया में खाद्यान्न का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर कृषि पर दिखने लगा है। इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि 2022 में लू की वजह से गेंहू के उत्पादन पर काफी असर पड़ा। मानसून का बारिश संतुलित नहीं होने से धान का रकबा भी काफी घट गया।