कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने रिटेल इनवेस्टर्स को भारी नुकसान से बचाने के लिए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को कई सुझाव दिए हैं। इनमें एल्गो-आधारित हेज फंडों के हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (एचएफटी) पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का सुझाव सबसे प्रमुख है। एचएफटी की वजह से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
एएमसी एक्जिक्यूटिव्स ने वित्तमंत्री को दी सलाह
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के एग्जिक्यूटिव्स ने 20 जून को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से मुलाकात की। FY25 के यूनियन बजट से पहले उन्होंने वित्तमंत्री को कई सुझाव दिए। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट पेश होने से पहले अलग-अलग सेक्टर के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी राय जानने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में उन्होंने 20 जून को एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के एग्जिक्यूटिव्स से मुलाकात की। सीएनबीसी आवाज ने इस बारे में बताया है।
STT बढ़ने से एचएफटी में कमी आएगी
वित्तमंत्री के साथ मीटिंग में मौजूद एक एएमसी के एग्जिक्यूटिव ने कहा, "एसटीटी बढ़ाने से एचएफटी फर्मों की एक्टिविटी में कमी आएगी, जिससे वे कम प्रॉफिट बनाएंगे। उन्हें तब प्रॉफिट होता है जब रिटेल ट्रेडर्स का लॉस होता है। अगर उनके प्रॉफिट में कमी आएगी तो रिटेल ट्रेडर्स के लॉस में भी कमी आएगी।" पिछले कुछ सालों में इंडिया में डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ा है।
डेरिवेटिव मार्केट में बढ़ी है रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी
डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी पर सरकार और रेगुलेटर्स ने चिंता जताई है, क्योंकि मार्केट क्रैश करने पर रिटेल इनवेस्टर्स को भारी नुकसान हो सकता है। एएमसी एग्जिक्यूटिव्स ने वित्तमंत्री को इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अगर हाई एफएंडओ वॉल्यूम वाले एचएफटी इनवेस्टर्स पर एसटीटी बढ़ाया जाता है तो इसका असर पड़ेगा। इससे Jane Street और Millennium जैसी बड़ी फर्मों के लिए बिजनेस की कॉस्ट बढ़ जाएगी। ये फर्में कस्टम-मेड एल्गो स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर इंडियन मार्केट्स में अरबों डॉलर कमाती हैं।
एचएफटी की वजह से रिटेल इनवेस्टर्स को लॉस
हाल में इन फर्मों के एल्गो-ट्रेड एग्जिक्यूशंस को ऑप्शन प्राइसेज में अचानक आए उछाल की वजह माना गया है। इससे स्टॉपलॉस ट्रिगर हो जाता है, जिससे दूसरे ऑप्शन ट्रेडर्स खासकर रिटेल इनवेस्टर्स को भारी लॉस उठाना पड़ता है। ऐसे बड़े ट्रेड को बोलचाल की भाषा में इंजेक्शन कहा जाता है। इंडिया में FY19 से FY24 के बीच F&O ट्रेडर्स की संख्या पांच गुनी हो गई है। फ्यूचर्स इंडस्ट्री एसोसिएशन के डेटा के मुताबिक, ट्रेडेड डेरिवेटिव कॉनट्रैक्ट्स की संख्या के लिहाज से एनएसई और बीएसई दुनिया के दो सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज है।