Budget 2024: क्या नई एनडीए सरकार के पहले बजट पर चुनावी नतीजों का असर दिखेगा?

करीब एक दशक बाद अगले महीने केंद्र की नई गठबंधन सरकार का पहला बजट आने वाला है। इस बजट पर स्टॉक मार्केट, अर्थशास्त्रियों, निवेशकों और इंडस्ट्री की करीबी नजरें लगी हुई हैं। माना जा रहा है कि इससे नई सरकार की आर्थिक पॉलिसी की दिशा का संकेत मिलेगा

अपडेटेड Jun 29, 2024 पर 6:11 PM
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मोदी 2.0 का फोकस इकोनॉमी की सेहत मजबूत बनाने के साथ ही इकोनॉमिक ग्रोथ तेज करने पर था। इसके नतीजे भी दिखे हैं।

केंद्र की नई एनडीए सरकार के पहले बजट के आने में एक महीना से कम समय बचा है। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है जब केंद्र की नई सरकार में सहयोगी दलों की ताकत बढ़ी हैं। इस महीने की शुरुआत में आए लोकसभा चुनावों के नतीजों में बीजेपी को बड़ा झटका लगा। वह खुद के दम पर सरकार बनाने लायक सीटें हासिल नहीं कर पाई। सवाल है कि क्या अगले महीने आने वाले बजट पर बदले राजनीतिक समीकरण का असर पड़ेगा?

सरकार की आर्थिक नीति जारी रहने के संकेत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही एक दशक के बाद देश में गठबंधन सरकार का दौर लौट आया है, लेकिन नई सरकार पर गठबंधन का कोई दबाव अब तक नहीं दिखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं। नई सरकार के वजूद में आए दो हफ्तों से ज्यादा समय बीत चुका है। प्रधानमंत्री ने जो मंत्रीमंडल बनाया है, उसे देख ऐसा लगता है कि सरकार की आर्थिक पॉलिसी बदलने नहीं जा रही है। हालांकि, बजट (Budget 2024) आने के बाद ही इस बारे में तस्वीर साफ हो सकेगी।


इकोनॉमी की सेहत ठीक करने पर फोकस बना रहेगा

मोदी 2.0 का फोकस इकोनॉमी की सेहत मजबूत बनाने के साथ ही इकोनॉमिक ग्रोथ तेज करने पर था। इसके नतीजे भी दिखे हैं। FY24 में राजकोषीय घाटा टागरेट से कम रहा। बीते फाइनेंशियल ईयर की इकोनॉमिक ग्रोथ भी 8 फीसदी से ज्यादा है। सरकार फिस्कल कंसॉलिडेशन के रास्ते पर बढ़ते दिखी है। इसका ठोस संकेत इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में मिला था। लोकसभा चुनावों से पहले आए इस बजट में सरकार ने लोकलुभावन एलानों से दूरी बनाए रखी। यह 2019 के उलट था, जब अंतरिम बजट में सरकार ने कई बड़े ऐलान किए थे।

कम इनकम वाले लोगों और मिडिल क्लास को टैक्स में राहत की उम्मीद

माना जा रहा है कि जुलाई में आने वाले बजट में सरकार का जोर संतुलन बनाने पर होगा। सरकार का फोकस एक तरफ फिस्कल कंसॉलिडेशन और तेज इकोनॉमिक ग्रोथ जारी रखने वाले उपायों पर होगा तो दूसरी तरफ वह कम इनकम और मिडिल क्लास को टैक्स में राहत दे सकती है। सरकार ने कुछ साल पहले कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में कमी की थी। उसकी तारीफ हुई थी। उसके अच्छे नतीजे भी दिखे हैं। अब समय उस वर्ग को राहत देने की है, जिसके कंधों पर देश की इकोनॉमी का भार है।

मिडिल क्लास को राहत से कंजम्प्शन बढ़ाने में मिलेगी मदद

प्रमुख उद्योग चैंबर CII वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को कम इनकम वाले लोगों पर टैक्स घटाने की सलाह दे चुका है। उसका मानना है कि इस एक कदम के दो फायदे होंगे। पहला बढ़ती महंगाई से बेहाल मिडिल क्लास और कम इनकम वाले लोगों को राहत मिलेगी तो दूसरी तरफ इकोनॉमी में कंजम्प्शन बढ़ेगा। FY24 में इकोनॉमी की ग्रोथ 8.2 फीसदी रही है लेकिन कंजम्प्शन की ग्रोथ इसका आधा रही है। सीआईआई ने सरकार को MGNREGA जैसी जॉब गारंटी स्कीम की मजदूरी बढ़ाने का भी सुझाव दिया है। इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा पहुंचेगा।

किसानों की इकनम बढ़ाने पर बजट में होंगे उपाय

सरकार किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा सकती है। कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी सहित कृषि से जुड़े कई संगठनों ने इस बारे में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को सलाह दी है। घरेलू बाजार में कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने खानेपीने की चीजों के निर्यात पर करीब दो साल पहले प्रतिबंध लगाना शुरू किया था। सरकार ने दालों और वनस्पति तेलों पर आयात शुल्क में कमी की है।

 

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रोजगार के मौके पैदा करने पर सेक्टर के लिए इनसेंटिव

सीआईआई सहित कई एक्सपर्ट्स ने सरकार को रोजगार बढ़ाने के उपायों पर फोकस करने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के मौके बढ़ाने पर अपना फोकस रखा है। इसके लिए प्राइवेट इनवेस्टमेंट में इजाफा जरूरी है। पिछले कई सालों से सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाकर इकोनॉमी को सहारा देने की कोशिश कर रही है। लेकिन, बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके पैदा करने के लिए प्राइवेट इनवेस्टमेंट जरूरी है। उम्मीद है कि बजट में सरकार उन सेक्टर के लिए प्रोत्साहन का ऐलान कर सकती है, जिनमें बड़ी संख्या में रोजगार के मौके पैदा करने की गुंजाइश है।

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