ब्रोकरेज फर्मों को यूनियन बजट से कई उम्मीदें हैं। हालांकि, उन्हें सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स बढ़ने की चिंता भी है। उनका मानना है कि अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दोनों में किसी तरह का बदलाव करती हैं तो उसका मार्केट के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर खराब असर पड़ेगा। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अगर एसटीटी बढ़ाया जाता है तो इससे वॉल्यूम में गिरावट आ सकती है। इसकी वजह यह है कि ट्रेडर्स अभी जिस तरह से फ्रीक्वेंट्ली ट्रेड करते हैं, उस तरह से एसटीटी बढ़ने के बाद नहीं करेंगे। दरअसल, एसटीटी बढ़ने के बाद ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी।
लिक्विडिटी में आ सकती है गिरावट
ट्रेडिंग कॉस्ट पहले से ही 1 अक्टूबर से बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इस तारीख से यूनिफॉर्म एक्सचेंज फी रीजीम लागू हो जाएगी। एसटीटी का मतलब Securities Transaction Tax है, जो लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को खरीदने और बेचने पर लगता है। मार्केट से जुड़े एक सूत्र ने बताया, "अगर STT बढ़ाया जाता है तो यह ज्यादातर F&O सेगमेंट के लिए होगा न कि कैश सेगमेंट के लिए।" हालांकि, उन्होंने यह माना का एसटीटी बढ़ने से मार्केट में लिक्विडिटी घटेगी। इसकी वजह यह है कि मार्केट की लिक्विडिटी में इंट्रा-डे ट्रेडर्स का काफी योगदान होता है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ने का भी पड़ेगा असर
प्राइमस पार्टनर्स का इस बारे में मानना है कि एसटीटी 20-30 फीसदी बढ़ने से ट्रेडर्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि टैक्स अबस्लूयट टर्म्स में होता है, जिससे इसका असर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा। अगर एसटीटी ज्यादा बढ़ाया जाता है तभी इसका खास असर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर एसटीटी के साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ाया जाता है तो इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम पर काफी असर पड़ेगा।
अभी ऑप्शन की बिक्री पर 0.0625 फीसदी एसटीटी लगता है, जिसका पेमेंट सेलर (Seller) करता है। ऐसे ऑप्शन की बिक्री जिसमें ऑप्शन को एक्सरसाइज किया जाता है, उसमें टैक्स का रेट 0.125 फीसदी है। इसका पेमेंट बायर करता है। फ्यूचर बेचने पर 0.0125 फीसदी एसटीटी लगता है, जिसका पेमेंट सेलर करता है। सरकार के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में एसटीटी की अच्छी हिस्सेदारी है। इसलिए एसटीटी बढ़ाने से सरकार का रेवेन्यू बढ़ सकता है।
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डीमैट अकाउंट की संख्या 16 करोड़ के पार
पिछली कुछ तिमाहियों में ब्रोकर्स फर्मों की क्लाइंट की संख्या और डीमैट अकाउंट की संख्या काफी बढ़ी है। जून 2024 में डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़कर 16.2 करोड़ पहुंच गई। जून में 42 लाख नए डीमैट अकाउंट खुले। यह फरवरी 2024 के बाद सबसे ज्यादा है।