यूनियन बजट पेश होने से पहले कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की चर्चा है। इस पर एनालिस्ट्स और इनवेस्टर्स की अलग-अलग राय है। जेफरीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस्टोफर वुड ने सीएनबीसी-टीवी18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस बारे में अपनी राय बताई। उन्होंने कहा कि अगर कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव होता है तो इसका मार्केट पर उतना असर नहीं पड़ेगा, जितनी उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने दूसरे देशों में लागू कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों का जिक्र किया।
कैपिटल गेंस टैक्स में बदलाव का स्टॉक मार्केट पर व्यापक असर पड़ेगा
वुड ने कहा कि हांगकांग में कैपिटल गेंस टैक्स नहीं है। अगर इंडिया में इस तरह की व्यवस्था शुरू की जाती है तो इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मार्केट का विस्तार होगा। उन्होंने लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा देने के लिए कैपिटल गैंस टैक्स के नियमों में बदलाव को अहम बताया। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में काफी फर्क होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर सरकार बजट में कैपिटल मार्केट को लेकर ऐलान करती है तो इसका शेयर बाजार पर इलेक्शन के रिजल्ट्स से ज्यादा असर पड़ेगा।
12 महीनों के बाद शेयरों को बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है
कैपिटल गेंस का मतलब उस प्रॉफिट से है, जो शेयरों सहित दूसरी सिक्योरिटीज में निवेश करने पर होता है। शेयरों और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों पर दो तरह का कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। कई एनालिस्ट्स का मानना है कि सरकार बजट में शेयरों के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगी। अभी शेयरों म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों को 12 महीने के बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। 1 लाख रुपये से ऊपर के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 10 फीसदी टैक्स लगता है।
समीर अरोड़ा भी कैपिटल गेंस टैक्स नहीं बढ़ाने की दी है सलाह
हाल में हेलियोस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव नहीं करने की सलाह दी थी। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए यह बताने की कोशिश की थी कि अगर इनवेस्टर्स के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता है तो रिफॉर्म्स वाले बजट का भी निवेशकों पर अच्छा असर नहीं पड़ता है।
कैपिटल गेंस टैक्स में बदलाव नहीं होना चाहिए
उन्होंने कहा था कि रिफॉर्म्स में निवेशकों का ध्यान रखना जरूरी है। उनका कहना था कि अगर कैपिटल गेंस टैक्स में अचानक किसी तरह का बदलाव किया जाता है तो इसका स्टॉक मार्केट के सेंटिमेंट पर खराब असर पड़ेगा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भी कहा है कि सरकार को बजट में कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं करना चाहिए।