Interim Budget 2024 : उद्योग चैंबर कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यानी सीआईआई (CII) ने अंतरिम बजट (Interim Budget) से अपनी उम्मीदों के बारे में बताया है। उसने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की समयसीमा बढ़ाने, इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने और कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव करने की मांग की है। उसने कहा है कि अभी कैपिटल गेंस टैक्स के लिए अलग-अलग एसेट के लिए होल्डिंग पीरियड और टैक्स के रेट अलग-अलग हैं। कुछ एसेट्स में इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है, जबकि कुछ में नहीं मिलता है। उसने इन नियमों को आसान बनाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, डेट म्यूचुअल फंड्स, आरईआईटी, आईएनवीआईटी, बॉन्ड्स आदि के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का रेट 10 फीसदी और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का रेट 15 फीसदी होना चाहिए। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के लिए मिनिमम होल्डिंग पीरियड 12 महीने होना चाहिए।
बजट 2024 में कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को आसान बनाने के हो सकते हैं ऐलान
उसने कहा है कि नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स जैसे जमीन के लिए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्सपेयर के स्लैब रेट के हिसाब से लगना चाहिए, जबकि जबकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के लिए टैक्स रेट 20 फीसदी होना चाहिए। साथ ही इंडेक्सेशन का बेनेफिट मिलना चाहिए। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म का निर्धारण 36 महीने के आधार पर होना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कोई एसेट 36 महीने या इससे ज्यादा समय बाद बेचा जाता है तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगना चाहिए। इस अवधि से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगना चाहिए।
पिछले बजट में डेट फंड्स के कैपिटल गेंस टैक्स नियम बदल गए थे
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में डेट फंड्स के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस और इंडेक्सेशन बेनेफिट को खत्म करने का ऐलान किया था। सीआईआई का कहना है कि डेट फंड्स पर कैपिटल गेंस टैक्स बेनेफिट दोबारा लागू करने और इन्हें इक्विटी फंड जैसा मानने की जरूरत है।
शेयर बायबैक के टैक्स नियमों में भी बदलाव करने की मांग
सीआईआई ने शेयर बायबैक के टैक्स के नियमों में भी बदलाव करने की मांग की है। शेयर बायबैक में कंपनी शेयरहोल्डर्स से अपने ही शेयर प्रीमियम रेट पर खरीदती है। वह ऐसा दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट ऑफर के जरिए करती है। अभी ओपन मार्केट रूट से शेयर खरीदने पर कंपनी 20 फीसदी बायबैक टैक्स चुकाती है। साथ ही शेयरहोल्डर्स को बेचे गए शेयरों पर हुए कैपिटल गेंस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। सीआईआई ने कहा है कि ओपन मार्केट रूट से शेयर खरीदने पर कंपनियों को बायबैक टैक्स से छूट मिलनी चाहिए।