Budget 2024: क्या फुल बजट बनाने के लिए सरकार जीरो से शुरुआत करती है?

सरकार जल्द संसद के मानसून सत्र का ऐलान कर सकती है। इसके 22 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। मानसून सत्र के पहले दिन ही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण FY25 का फुल बजट पेश कर सकती हैं

अपडेटेड Jun 26, 2024 पर 5:04 PM
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वित्त मंत्रालय बजट बनाने के लिए सबसे पहले नीति आयोग की राय जानने की कोशिश करता है।

एनडीए की नई सरकार के पहले बजट पर नजरें लगी हैं। इस बजट से हर वर्ग को उम्मीदें हैं। मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद है। किसानों को पीएम सम्मान निधि का पैसा बढ़ने की उम्मीद है। स्टार्टअप्स का मानना है कि फंडिंग संकट दूर करने के लिए सरकार बजट में बड़े ऐलान करेगी। इधर, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण करीब एक हफ्ते से बजट के बारे में इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर की राय जानने की कोशिश कर रही हैं।

सबसे पहले नीति आयोग से चर्चा

वित्त मंत्रालय बजट बनाने के लिए सबसे पहले नीति आयोग की राय जानने की कोशिश करता है। उसके बाद वह सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से इस बारे में चर्चा करता है। आम तौर पर यह प्रक्रिया हर साल अगस्त-सितंबर में शुरू हो जाती है। इसका मतलब है कि बजट पेश होने के छह महीने पहले उसे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस साल फरवरी में पेश अंतरिम बजट बनाने की प्रक्रिया भी सरकार ने पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में शुरू कर दी थी।


बजट डिवीजन नोडल एजेंसी का काम करता है

डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स का बजट डिवीजन यूनियन बजट बनाने के लिए नोडल एजेंसी का काम करता है। बजट डिवीजन ज्वाइंट सेक्रेटरी/एडिशनल सेक्रेटरी के सुपरविजन में काम करता है। बजट के लिए इनपुट्स जुटाने के लिए वित्तमंत्रालय के अधिकारी राज्यों के अधिकारियों की राय भी जानने की कोशिश करते हैं। बैंकर्स, किसानों के प्रतिनिधि और इकोनॉमिस्ट्स की राय भी ली जाती है। उसके बाद बजट का खाका तैयार होता है।

1 फरवरी को पेश हो चुका है अंतरिम बजट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश हो चुका है। इसलिए सरकार के पास ज्यादातर डेटा और इनपुट्स उपलब्ध हैं। वह इनका इस्तेमाल अंतरिम बजट बनाने के लिए कर चुकी है। इसलिए जुलाई में पेश होने वाले बजट के लिए सरकार को जीरो से शुरुआत नहीं करनी है।

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फुल बजट में हो सकते हैं बड़े ऐलान

हालांकि, अंतरिम बजट में सरकार ने कोई बड़ा ऐलान नहीं किया था। इसलिए इस बार बजट से काफी उम्मीद हैं। इस बीच, राजनीतिक स्थितियां बदली हैं। अब केंद्र की एनडीए सरकार सहोयगी दलों पर निर्भर है। ऐसे में सरकार का फोकस वेल्फेयर स्कीम पर बढ़ सकता है। इसके लिए सरकार को अपना हिसाबकिताब करना होगा। उसके सामने फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रण में रखते हुए खर्च बढ़ाने की चुनौती है।

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