इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) की घटती बिक्री पर चिंता जताई है। इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ईवी की बिक्री में गिरावट दिखी है। अप्रैल से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री की ग्रोथ घटी है, जबकि इलेक्ट्रिक पैसेंजर्स व्हीकल्स की बिक्री में गिरावट आई है। एक्सपर्ट्स फेम II की एक्सपायरी को इसकी वजह मान रहे हैं। 31 मार्च, 2024 को फेम II स्कीम खत्म हो गई। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कीमतें काफी बढ़ गई है।
2030 तक बिक्री में ईवी की 30 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों से बढ़ती महंगाई ने पहले से ही लोगों पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में लोग इनवायरमेंट फ्रेंडली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदने में कम दिलचस्पी दिखा सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार इस महीने पेश होने वाले बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर इनसेंटिव के लिए बड़े फंड का ऐलान करेगी? सरकार ने 2030 तक व्हीकल्स की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी बढ़ाकर 30 फीसदी तक करने का टारगेट तय किया है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री तेजी से बढ़ने की उम्मीद
सरकार का मानना है कि 2030 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का इस्तेमाल करीब 75-80 फीसदी तक पहुंच जाएगा। जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि टू-व्हीलर्स के कुल रजिस्ट्रेशन में ईवी की हिस्सेदारी FY2021 में 0.4 फीसदी थी, जो FY2023 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 4.6 फीसदी पर पहुंची है। यह पिछले दो साल में ज्यादातर समय 4-6 फीसदी के बीच रही है।
फेम II से बढ़ गई थी सेल्स
सरकार ने मई-जून 2021 में ईवी पर इनसेंटिव 50 फीसदी तक बढ़ा दिया था। इससे यह इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के एक्स-फैक्ट्री प्राइस के करीब 40 फीसदी तक पहुंच गया था। इसका असर ईवी की बिक्री पर पड़ा था। लेकिन, इस साल 31 मार्च को इनसेंटिव खत्म होने का असर बिक्री पर पड़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में बैटरी और सेल जैसे ईवी कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए भी बड़े इनसेंटिव का ऐलान कर सकती हैं। सरकार इन कंपोनेंट का तब तक आयात करने की इजाजत दे सकती है, जब तक देश में इनका पर्याप्त उत्पादन शुरू नहीं हो जाता।
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ईवी पर टैक्स के रोडमैप की जरूरत
हाल में ईवी बनाने वाली एक बड़ी कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने कहा था कि सरकार अगर जीएसटी से जुड़ी मांग पूरी नहीं करती है तो उसे कम से कम ईवी पर टैक्स को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश करना चाहिए। इससे ईवी मैन्युफैक्चरर्स को लंबी अवधि के निवेश के बारे में फैसले लेने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अगर आने वाले सालों में ईवी का इस्तेमाल बढ़ाना चाहती है तो उसे इसके लिए इनसेंटिव की स्कीम पेश करनी होगी।