स्टॉक मार्केट 4 जून को आई गिरावट से 12 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। केंद्र की नई सरकार मोदी 2.0 से बहुत अलग नहीं दिख रही। केंद्र की गठबंधन सरकार की आर्थिक नीति की दिशा का पता यूनियन बजट से चलेगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को यूनियन बजट पेश करेंगी। इस बीच, स्टॉक मार्केट में तेजी का रुख है। अभी निफ्टी न तो बहुत सस्ता है और न ही बहुत महंगा है। इससे बजट से होने वाले ऐलान का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ने की उम्मीद है।
बाजार की नजरें कैपिटल एक्सपेंडिचर पर
अंतरिम बजट (Interim Budget) में कुल फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) 16.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। उम्मीद है कि यह इससे कम रहेगा। ऐसे में बाजार की ज्यादा नजर कैपिटल एक्सपेंडिचर पर होगी। अंतरिम बजट में इसके लिए 11.1 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। यह जीडीपी का 3.4 फीसदी है। साल दर साल यह 17 फीसदी की ग्रोथ है।
फिस्कल कंसॉलिडेशन पर फोकस बना रहेगा
यूनियन बजट में सरकार के पूंजीगत खर्च बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस जारी रखने, रोजगार के मौके बढ़ाने के उपाय, कंज्यूमर सेंटिमेंट बढ़ाने के उपाय और ग्रामीण इलाकों में इनकम बढ़ाने के उपायों का स्टॉक मार्केट स्वागत करेगा। इसके अलावा केंद्र में गठबंधन सरकार बनने के बावजूद मार्कट यह उम्मीद करेगा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस फिस्कल कंसॉलिडेशन पर बना रहेगा।
सरकार रेवेन्यू के लिहाज से मजबूत स्थिति में
हालांकि, यह आसान नहीं लगता है, लेकिन मार्केट का मानना है कि सरकार का रेवेन्यू अभी ठीक दिख रहा है। फरवरी के अंतरिम बजट के मुकाबले अभी रेवेन्यू के मामले में सरकार की स्थिति अच्छी है। इसमें RBI से मिले 2.11 लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड का बड़ा योगदान है। सरकार ने फरवरी में पेश अंतरिम बजट में डिविडेंड 1.02 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था।
टैक्स कलेक्शन उम्मीद से ज्यादा
FY25 में अब तक सरकार का एक्चुअल टैक्स कलेक्शन 19 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। इसमें कॉर्पोरेट टैक्स में 20 फीसदी और पर्सनल इनकम टैक्स में 23 फीसदी ग्रोथ का हाथ है। एसटीटी क्लेक्शन भी दोगुना रहा है। सरकार ने कॉर्पोरेट और पर्सनल इनकम टैक्स की ग्रोथ 13 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। बेहतर रेवेन्यू को देखते हुए FY25 में फिस्कल डेफिसिट 5.1 फीसदी के टारगेट तक रहेगा। सरकार ने इसे FY26 तक 4.5 फीसदी तक लाने का टारगेट रखा है।
कंज्यूमर सेंटिमेंट बढ़ाने पर जोर
देश में डिफेंस इक्विपमेंट के उत्पादन के लिए डिफेंस के लिए सरकार ऐलोकेशन बढ़ा सकती है। रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए टेक्सटाइल्स जैसी इंडस्ट्री को PLI स्कीम के तहत लाने के ऐलान हो सकते हैं। सरकार स्टैंडर्ड डिक्शन बढ़ा सकती है। इसे 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जा सकता है। नई टैक्स रीजीम में बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट भी सरकार 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है। कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है।