Get App

Budget 2024: कैसे तैयार होता है सरकार का लेखा-जोखा, इतनी लंबी है पूरी प्रक्रिया

Budget 2024: अगले वित्त वर्ष 2024-25 के बजट के लिए काउंटडाउन लगभग शुरू हो चुका है। बजट को आम भाषा में कहें तो यह एक तरह से सरकार का बही-खाता है यानी कि सरकार की आय और खर्चों की पूरी डिटेल्स होती है। ऐसे में यह जानना अहम हो जाता है कि पूरे साल का बही-खाता तैयार कैसे होता है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 06, 2024 पर 11:06 AM
Budget 2024: कैसे तैयार होता है सरकार का लेखा-जोखा, इतनी लंबी है पूरी प्रक्रिया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार 1 फरवरी को जो बजट पेश करेंगी, वह पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए नहीं होगा।

Budget 2024: अगले वित्त वर्ष 2024-25 के बजट के लिए काउंटडाउन लगभग शुरू हो चुका है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इसे बजट सत्र के पहले दिन यानी 1 फरवरी को पेश करेंगी। बजट को आम भाषा में कहें तो यह एक तरह से सरकार का बही-खाता है यानी कि सरकार की आय और खर्चों की पूरी डिटेल्स होती है। इसमें सरकार अपने सभी खर्चों, विभिन्न योजनाओं और सेक्टर्स को आवंटित बजट का अनुमान पेश करती है। ऐसे में यह जानना अहम हो जाता है कि पूरे साल का बही-खाता तैयार कैसे होता है।

Budget 2024: ये है बजट की पूरी प्रक्रिया

बजट प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर सितंबर में शुरू होती है। वित्त मंत्रालय सभी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और ऑटोनॉमस बॉडीज को एक बजट सर्कुलर जारी करता है। इसमें उनसे अगले वित्त वर्ष के लिए अनुमान तैयार करने के लिए कहा जाता है। सभी सुझावों की समीक्षा के बाद वित्त मंत्रालय फंड आवंटन पर फैसला करता है। अगर इससे जुड़ा कोई विवाद होता है तो अंतिम रूप से पेश होने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल या प्रधान मंत्री से सलाह ली जाती है।

Budget 2024 : क्या है फाइनेंस बिल, यह जान जाएंगे तो बजट को समझना आसान हो जाएगा

अक्टूबर के आसपास विभिन्न मंत्रालयों के साथ प्री-बजट बैठकें होती हैं। सेक्रेटरी (एक्सपेंडिचर) की अगुवाई में ये बैठकें नवंबर के मध्य तक चलते हैं। इसके बाद जब स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री यानी सांख्यिकी मंत्रालय जनवरी के पहले सप्ताह में चालू वित्त वर्ष के जीडीपी का पहला अग्रिम अनुमान जारी कर देता है तो बजट से जुड़े अनुमानों को अंतिम रूप दिया जाता है। वित्त मंत्रालय अगले वित्त वर्ष के लिए एक निश्चित नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट तय करता है जिसका इस्तेमाल राजकोषीय घाटा लक्ष्य और टैक्स कलेक्शन इत्यादि के आधार के तौर पर किया जाता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें