Budget 2024 : यूनियन बजट 2024 (Union Budget 2024) पेश होने की तारीख नजदीक आने पर कुछ शब्द बार-बार सुनने को मिल रहे हैं। इनमें फाइनेंस बिल (Finance Bill) शामिल है। इसका बजट से क्या संबंध है, फाइनेंस बिल का मतलब क्या होता है, इकोनॉमी के लिए इसके क्या मायने हैं? ये ऐसे सवाल है जिनके जवाब जानने पर यूनियन बजट को समझना आसान हो जाएगा। वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश करेंगी। हालांकि, यह अंतरिम बजट होगा लेकिन इसमें वित्तमंत्री सरकार की इनकम और खर्च का अनुमान पेश करेंगी। इस पर एक्सपर्ट्स की निगाहें होंगी। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों के बाद जो नई सरकार बनेगी वह अगले वित्त वर्ष का पूर्ण बजट पेश करेंगी।
फाइनेंस बिल में कई चीजें शामिल होती हैं
फाइनेंस बिल (Finance Bill) को हिन्दी में वित्त विधेयक कहा जाता है। इसे यूनियन बजट का सबसे अहम डॉक्युमेंट माना जाता है। इसमें सरकार का फाइनेंशियल प्लान शामिल होता है। इनमें टैक्सेशन, रेवेन्यू, एक्सपेंडिचर और बॉरोइंग शामिल हैं। सरकार यूनियन बजट में इनके बारे में अगले वित्त वर्ष के अनुमान के बारे में बताता है। उदाहरण के लिए सरकार बजट में बताती है कि अगले वित्त वर्ष में उसे रेवेन्यू कितना रहने का अनुमान है। सरकार फाइनेंस बिल के जरिए टैक्स में बदलावों के प्रस्तावों पर संसद की मंजूरी हासिल करती है। इनकम टैक्स के रेट्स में बदलाव, स्लैब की संख्या, डिडक्शन और एग्जेम्पशंस में बदलाव के प्रस्ताव फाइनेंस बिल में शामिल होते हैं।
एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट का हिस्सा है फाइनेंस बिल
फाइनेंस बिल एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट का हिस्सा होता है, जिसे बजट भाषण के बाद संसद में पेश किया जाता है। फाइनेंस बिल कई तरह के होते हैं। इनमें सबसे अहम मनी बिल (Money Bill) है, जिसका उल्लेख संविधान के आर्टिकल 110 में किया गया है। किसी बिल या ड्राफ्ट को तब मनी बिल माना जाता है, जब उसमें टैक्स में बदलाव के प्रस्ताव, सरकार की उधारी या कंसॉलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से सरकार के पैसे निकालने के प्रस्ताव शामिल होते हैं। फाइनेंस बिल को तब मनी बिल नहीं माना जाता है, जब उसमें सिर्फ लाइसेंस या सर्विसेज के लिए फीस की डिमांड, जुर्माना या किसी और तरह की पेनाल्टी शामिल होती है।
75 दिन के अंदर पारित होना जरूरी
फाइनेंस बिल को सिर्फ लोकसभा में पेश किया जा सकता है। फिर इसे राज्य सभा में पेश किया जाता है। राज्य सभा इस बिल में संशोधन की सलाह दे सकती है। लेकिन, वह इसे पारित करने से इनकार नहीं कर सकती। पेश होने के 75 दिन के अंदर फाइनेंस बिल का संसद से पारित होना जरूरी है। लोकसभा में पारित हो जाने के बाद राज्य सभा को 14 दिन के अंदर इसे रिटर्न करना जरूरी होता है। वह संशोधन की अपनी सिफारिश के साथ इसे रिटर्न कर सकती है। राज्य सभा की सिफारिश को मानने या खारिज करने का अधिकार लोकसभा को है।
23 मार्च, 2023 को पास हुआ था फाइनेंस बिल 2023
लोकसभा ने फाइनेंस बिल 2023 के 24 मार्च, 2023 को पारित किया था। इसमें इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव के कई प्रस्ताव थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई थी। स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा नई रीजीम में भी देने का ऐलान वित्तमंत्री ने किया था।