Union Budget 2024 : एमएसएमई (MSME) उन सेक्टर में शामिल है, जिन पर कोरोना की महामारी की सबसे ज्यादा मार पड़ी थी। इस सेक्टर ने अच्छी रिकवरी दिखाई है। एमएसएमई से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर सरकार से इस सेक्टर को मदद मिलती है तो इसकी ग्रोथ बढ़ सकती है। इस सेक्टर को उम्मीद है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) यूनियन बजट (Union Budget) में एसएमएसई के लिए ऐलान कर सकती हैं। 1 फरवरी को वित्तमंत्री अंतरिम बजट पेश करेंगी। एमएसएमई सेक्टर का कहना है कि अंतरिम बजट में बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है। लेकिन, वित्तमंत्री कम से कम सस्ते कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने के उपाय कर सकती हैं। एमएसएमई को कारोबार के विस्तार से पूंजी की जरूरत है।
बजट 2024 में एमएसएई को मिल सकती है राहत
फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) के सेक्रेटरी जनरल अनिल भारद्वाज ने कहा कि कोरोना की महामारी के बाद इकोनॉमी ने अच्छी रिकवरी दिखाई है। माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) का प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। अब एमएसएमई सेक्टर को कारोबार के विस्तार से लिए पूंजी की जरूरत है। एमएसएमई इकाइयों को बैंकों और दूसरे स्रोतों से पूंजी हासिल करने में दिक्कत आती है। उम्मीद है कि वित्तमंत्री इसके लिए अंतरिम बजट में कदम उठाएंगी।
एमएसएमई के लिए रेटिंग की अनिवार्यता खत्म होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि एमएसएमई को लोन लिए रेटिंग के नियमों में रियायत चाहिए। कई एमएसएमई खासकर बड़े एमएसएमई को रेटिंग एजेंसियों से लोन की रेटिंग्स करानी पड़ती है। इसमें काफी कॉस्ट आती है। दुनिया के दूसरे देशों खासकर विकसित देशों में भी एमएसएमई के क्रेडिट रेटिंग कराना अनिवार्य नहीं है। बैंकों के पास एमएसएमई का आंकलन करने के लिए पर्याप्त क्षमता है। दूसरी दिक्कत यह है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां एमएसएमई की रेटिंग करने में उन्हीं स्टैंडर्ड्स का इस्तेमाल करती हैं, जो वे बड़ी कंपनियों की रेटिंग के मामले में करती हैं। सरकार एमएसएमई को इस मामले में राहत के लिए कदम उठा सकती है।
इकोनॉमी की ग्रोथ में एमएसएमई सेक्टर का बड़ा योगदान
पिछले साल वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए आवंटन काफी बढ़ाया था। उन्होंने एमएसएमई सेक्टर के लिए रिकॉर्ड 22,138 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ट्रेंड इस साल भी जारी रहने की उम्मीद है। एक्सपोर्ट में इस सेक्टर की करीब 45 फीसदी हिस्सेदारी है। जीडीपी में इसकी करीब 29 फीसदी हिस्सेदारी है। रोजगार के मौके पैदा करने में भी यह सेक्टर काफी आगे है।