Income Tax Budget 2024: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस महीने यूनियन बजट पेश करेंगी। इस बजट से इंडस्ट्रीज, टैक्सपेयर्स, इनवेस्टर्स, बिजनेसेज सभी को काफी उम्मीदे हैं। 1 फरवरी, 2024 को पेश अंतरिम बजट में निर्मला सीतारमण ने बड़े ऐलान नहीं किए थे। इसलिए यह माना जा रहा है कि जुलाई में पेश बजट में बड़े ऐलान हो सकते हैं। इस बजट से सीनियर सिटजींस को भी काफी उम्मीदे है। उनका मानना है कि पिछले कुछ समय से बढ़ती महंगाई ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी है। ऐसे में वित्तमंत्री बजट में उनके लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं।
कैपेटिल गेंस टैक्स से छूट की सीमा
सीनियर सिटीजंस यानी रिटार्यड लोगों को अपनी सेविंग्स और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर रहना पड़ता है। जिन लोगों को पेंशन नहीं मिलती है उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए शेयर और म्यूचु्अल फंड्स के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स से छूट की सीमा सरकार बढ़ा सकती है। अभी शेयरों और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स से छूट के लिए 1 लाख रुपये की सीमा तय है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को शेयरों और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश से एक साल में एक लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस होता है तो उसे टैक्स नहीं देना होगा। सरकार को सीनियर सिटीजंस के लिए यह सीमा बढ़कर कम से कम 2 लाख रुपये करने की जरूरत है।
बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनका अपना घर नहीं है। वे किराए के घर में रहते हैं। इस पर हर महीने काफी पैसा खर्च होता है। सरकार को ऐसे बुजुर्गों को हाउस रेंट पर टैक्स डिडक्शन की सुविधा देनी चाहिए, जिन्हें नियमित रूप से पेंशन नहीं मिलती है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्गों को राहत मिलेगी, जिनकी पेंशन इनकम नहीं है। देश में ऐसे सीनियर सीटिजंस की बड़ी संख्या है जिनकी पेंशन इनकम नहीं है और जो किराए के घरों में रहते हैं।
हेल्थ पॉलिसी पर ज्यादा टैक्स छूट
पिछले कुछ सालों खासकर कोविड की महामारी के बाद प्राइवेट हाॉस्पिटल में इलाज करना बहुत महंगा हो गया है। बगैर हेल्थ पॉलिसी प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज कराने के बारे में कई लोग सोच भी नहीं सकते। इधर, इंश्योरेंस कंपनियों ने हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहुत बढ़ा दिया है। लेकिन, पिछले कई सालों से हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन की लिमिट नहीं बढ़ी है। अभी सीनियर सिटीजंस के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन के लिए 50,000 रुपये की लिमिट तय है। सरकार को इसके बढ़ाकर कम से कम 1 लाख रुपये करने की जरूरत है।
टैक्स-सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स पर लॉक-इन पीरियड में कमी
सरकार को टैक्स-सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट में सीनियर सिटीजंस के निवेश पर लॉक-इन पीरियड घटाना चाहिए। अभी बैंक या पोस्ट-ऑफिस के टैक्स सेविंग्स एफडी पर लॉक-इन पीरियड 5 साल है। म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम यानी ELSS में लॉक-इन पीरियड 3 साल है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण सीनियर सिटीजंस के लिए ऐसे इंस्ट्रूमेट्स के लॉक-इन पीरियड को घटा सकती हैं। इससे बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजंस को फायदा होगा। अभी उन्हें अपनी सेहत की देखभाल पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें पैसे की कमी हो जाती है। लॉक-इन पीरियड घटने पर उनकी मुश्किल कुछ हद तक दूर हो जाएगी।
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सेक्शन 80टीटीबी की लिमिट बढ़ाई जाए
अभी बैंक या कोऑपरेटिव सोसायटी में डिपॉजिट पर 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम पर डिडक्शन का फायदा मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स से मिलने वाले इंटरेस्ट को भी इस सेक्शन के दायरे में लाना चाहिए। इससे बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजंस को राहत मिलेगी। अभी सीनियर सिटीजंस एनएससी जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में काफी निवेश करते हैं।