Budget 2024: प्राइवेट इनवेस्टमेंट से रोजगार के मौके बढ़ाने के साथ तेज ग्रोथ पर फोकस करना होगा

Budget 2024: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण अगले महीने पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रही है। 19 जून को उन्होंने प्रमुख इकोनॉमिस्ट्स के साथ मीटिंग की थी। इसमें इकोनॉमिस्ट्स ने सरकार को इकोनॉमी को लेकर कई सलाह दी

अपडेटेड Jun 25, 2024 पर 1:22 PM
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वित्तमंत्री के साथ मीटिंग में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने फिस्कल प्रूडेंस, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और BoP से जुड़े मसलों से निपटने के लिए सरकार की तारीफ की।

फाइनेंस मिनिस्ट्री यूनियन बजट 2024 पेश करने से पहले इकोनॉमिस्ट्स, किसान, एनबीएफसी और मार्केट एक्सपर्ट्स सहित इकोनॉमी के अलग-अलग सेक्टर के प्रतिनिधियों से सलाह कर रही है। 19 जून को प्रमुख इकोनॉमिस्ट्स को चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था। सरकार अगले महीने पेश होने वाले बजट से पहले एक्सपर्ट्स की राय जानना चाहती है। मार्केट का मूड अच्छा है, क्योंकि जीडीपी ग्रोथ स्ट्रॉन्ग है, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इनफ्लेशन घट रहा है। अप्रैल में सीपीआई इनफ्लेशन में कमी आई है। डब्ल्यूपीआई इनफ्लेशन निगेटिव जोन में आ गया है। फिस्कल डेफिसिट बजट के अनुमान से कम रहा है।

सरकार की वित्तीय सेहत मजबूत

रुपये में कमजोरी आई है। पिछले वित्त वर्ष में रुपया में 1.4 फीसदी कमजोरी आई, जो ज्यादा नहीं है। बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) में करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) जीडीपी का मुश्किल से 0.7 फीसदी रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) जून के पहले हफ्ते में 665.8 अरब डॉलर पहुंच गया। अब मोदी 3.0 सरकार के सामने तेज ग्रोथ को बनाए रखने की चुनौती है। साथ ही उसे इनफ्लेशन खासकर फूड इनफ्लेशन और बेरोजगारी से निपटना होगा। वित्तमंत्री के साथ मीटिंग में शामिल इकोनॉमिस्ट्स ने फिस्कल प्रूडेंस, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और BoP से जुड़े मसलों से निपटने के लिए सरकार की तारीफ की। फिस्कल प्रूडेंस को जारी रखने के मामले में कोई समझौता नहीं हो सकता।


पूंजीगत खर्च के लिए पैसे की जरूरत

फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रण में रखते हुए ग्रोथ के उपाय जारी रखने को लेकर इकोनॉमिस्ट्स में सहमति नजर आई। चूंकि, सरकार अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट 5.1 फीसदी रखने का प्रस्ताव पेश कर चुकी है, जिससे अब सरकार के इस लक्ष्य से भटकने की कोई वजह नजर नहीं आती। लेकिन, सरकार को पूंजीगत खर्च खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ज्यादा फंड की जरूरत पड़ सकती है। सरकार को वेल्फेयर स्कीम खासकर प्रधानमंत्री आवास योजना पर खर्च बढ़ाना होगा। पीएलआई स्कीम के दायरे में कुछ नए सेक्टर्स को लाना होगा। साथ ही बेरोजगारी खासकर शिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने होंगे।

रोजगार के मौकों पर फोकस करना होगा

कुछ इकोनॉमिस्ट्स ने खासकर AI जैसी नई टेक्नोलॉजी की वजह से नौकरियों के मौकों में कमी पर चिंता जताई। इस बात पर सहमति दिखी की नई टेक्नोलॉज की अनदेखी नहीं की जा सकती लेकिन, जिन्हें नौकरियां मिल रही हैं उन्हें उनका ख्याल रखना होगा, जो लॉस में हैं। 'रोबोट टैक्स' लगाने की संभावनाओं पर विचार हुआ। इससे आने वाले पैसे का इस्तेमाल उन वर्कर्स के कौशल को बढ़ाना के लिए किया जा सकता है जो विस्थापित हो चुके हैं।

PLI के नए चरण की जरूरत

IMF की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि AI से भले ही रोजगार के मौके और मेहनताना बढ़ाया जा सकता है लेकिन, इसके चलते बड़ी संख्या में लोग लंबे समय के लिए बेरोजगार हो सकते हैं। यह काफी परेशान करने वाला बदलाव होगा। पीएलआई स्कीम के पहले चरण की सफलता उत्साहित करने वाली है। इससे APIs, डिफेंस इक्विपमेंट, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई चीजों के लिए चीन पर निर्भरता घटी है। इकोनॉमिस्ट्स ने पीएलआई के दूसरे चरण की सलाह दी जिसका फोकस MSME पर रखा जा सकता है।

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घरेलू निवेश के लिए अनुकूल माहौल जरूरी

ई-प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाने से डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड प्रोडक्ट्स में प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कई दूसरे इंडस्ट्रीज और स्टार्टअप्स में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। घरेलू स्रोतों से इस निवेश के लिए फंड की उपलब्धता के लिए हमें घरेलू निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाना होगा। प्राइइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए कई उपायों पर चर्चा हुई।

अश्विनी महाजन

(लेखक दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज में प्रोफेसर हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। ये इस पब्लिकेशन के विचार नहीं हैं)

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