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Budget 2024: शेरो-शायरी की वजह से आज भी होती है इन 5 बजटों की खूब चर्चा

Union Budget: बजट में भाषण के बीच शेरो-शायरी के इस्तेमाल की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है। वित्तमंत्री अपनी बात को दमदार तरीके से रखने के लिए ऐसा करते हैं। लंबे बजट भाषण के बीच इस तरह की शायरी या कविता लोकसभा के सदस्यों का मनोरंजन करती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 13, 2024 पर 1:11 PM
Budget 2024: शेरो-शायरी की वजह से आज भी होती है इन 5 बजटों की खूब चर्चा
Nirmala Sitharaman’s Budget: पूर्व प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 के बजट भाषण में प्रसिद्ध फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो के कोट्स का इस्तेमाल किया था।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को बजट पेश करेंगी। यह केंद्र की नई एनडीए सरकार का पहला बजट होगा। मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद है। सीनियर सिटीजंस को भी इस बजट से कई उम्मीदें हैं। इसलिए निर्मला सीतारमण के बजट पर निगाहें लगीं हैं। वह पिछले यूनियन बजटों में वह कविता और मशहूर लेखकों के कोट्स का जिक्र करती रही हैं। आइए जानते हैं उन वित्तमंत्रियों के बारे में जिनके बजट भाषण की चर्चा आज भी होती है।

मनमोहन सिंह (1991)

पूर्व प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने 1991 के बजट भाषण में प्रसिद्ध फ्रेंच लेखक विक्टर ह्यूगो के कोट्स का इस्तेमाल किया था। उन्होंने इंडियन इकोनॉमी की संभावनाओं के बारे में बताने के लिए ऐसा किया था। ह्यूगो ने कहा था, "धरती की कोई ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका समय आ चुका है।" इसका उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा था कि इंडिया की बढ़ती ताकत ऐसा ही एक विचार है। उन्होंने कहा था कि पूरी दुनिया को जान लेना चाहिए कि इंडिया अब जग चुका है। हम जीतेंगे। हम मुश्किलों से निजात पाएंगे। 1991 के बजट को इसलिए बहुत याद किया जाता है, क्योंकि इसमें इकोनॉमी को जंजीरों से बाहर निकालने की कोशिश की गई थी।

यशवंत सिन्हा (2001)

पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने 2001 के अपने बजट भाषण में शायरी का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, "तकाजा है वक्त का कि तूफान से जूझो, कहां तक चलोगे किनारे-किनारे?" उनकी इस शायरी की काफी चर्चा हुई थी। तब केंद्र में एनडीए की सरकार थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उनके कार्यकाल में सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए थे।

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