Budget 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अगले वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश करेंगी। यह अंतरिम बजट होगा और लोकसभा चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी। बजट में पूरे वित्त वर्ष के लिए रेवेन्यू और खर्च का विवरण होता है। सरकार को जो रेवेन्यू मिलता है, वह टैक्स के जरिए भी आता है और नॉन-टैक्स के तौर पर भी। टैक्स से रेवेन्यू का अर्थ तो सीधे समझ आ रहा है कि यह टैक्स के जरिए मिला है और यह राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है। वहीं नॉन-टैक्स रेवेन्यू की बात करें तो यह अन्य स्रोतों से अर्जित आय है।
इसके तहत कर्ज पर ब्याज कमाई, पीएसयू में निवेशों पर डिविडेंड, फीस और सर्विसेज से कमाई आते हैं। नॉन-टैक्स रेवेन्यू की बात करें तो इस वित्त वर्ष 2023-24 का अनुमान 3,01,650 करोड़ रुपये है जो वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में 15.2 फीसदी अधिक है। अब यह जानना बाकी है कि नॉन-टैक्स रेवेन्यू में क्या-क्या आते हैं।
ब्याज: सरकार को नॉन-प्लान्ड प्रोजेक्ट, 20 साल के मेच्योरिटी पीरियड वाली प्लान्ड प्रोजेक्ट्स के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए गए कर्ज पर ब्याज मिलता है। इसके तहत पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज, पोर्ट ट्रस्टों और बाकी वैधानिक निकायों को दिए गए कर्ज पर ब्याज भी शामिल है।
पेट्रोलियम लाइसेंसिंग: कुछ खास क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन एक्टिविटीज के लिए कंपनियों को एक्स्क्लूसिव राइट्स दिया जाता है जिसके बदले में सरकार को फीस के रूप में रकम मिलती है। यह फीस रॉयल्टी, एक निर्धारित अवधि में कुछ क्षेत्रों से हुए मुनाफे के हिस्से, पेट्रोलियम एक्स्प्लोरेशन लाइसेंस (PEL) या प्रोडक्शन लेवल पेमेंट्स (PLPs) की लागत के रूप में होता है।
डिविडेंड्स और प्रॉफिट्स: इसके तहत केंद्रीय बैंक RBI से मिलने वाला सरप्लस, सरकारी कंपनियों से डिविडेंड और मुनाफा आता है।
कम्युनिकेशन सर्विसे फीस: इसके तहत टेलीकॉम डिपार्टमेंट को स्पेक्ट्रम यूजेज के लिए लाइसेंसिंग फीस आता है जो टेलीकॉम ऑपरेटर्स देती हैं।
इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई चार्जेज: इसके तहत इलेक्ट्रिसिटी (सप्लाई) एक्ट के तहत इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी से मिलने वाला कवरिंग फीस आता है।
ब्रॉडकास्टिंग फीस: इसके तहत वह लाइसेंस फीस आता है जिसे डीटीएच प्रोवाइडर्स, कॉमर्शियल एफएम रेडियो सर्विसेज, कॉमर्शियल टीवी सर्विसेज और इसी प्रकार की एंटिटीज चुकाती हैं।
रोड और ब्रिज यूजेज चार्जेज: यह सार्वजनिक सड़कों और लंबे पुलों के टोल बूथ पर किए गए पेमेंट्स के रूप में मिलता है।
टैक्स रेवेन्यू और नॉन-टैक्स रेवेन्यू में क्या है फर्क
डायरेक्ट टैक्स किसी इंडिविजुअल या एंटिटी की इनकम पर लगती है तो इनडायरेक्ट टैक्स गुड्स और सर्विसेज के लेन-देन की लागत पर लगता है। वहीं दूसरी तरफ नॉन-टैक्स रेवेन्यू सरकारी सर्विसेज के पेमेंट से जुड़ा हुआ है जैसे कि विभिन्न उद्देश्यों के लिए सरकार ने जो लोन लिया है, उस पर ब्याज। टैक्स किसी की आय के एक हिस्से और उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होते हैं, जबकि नॉन-टैक्स रेवेन्यू केवल सरकारी सर्विसेज और संपत्तियों के उपयोग के चलते जेनेरेट होता है। टैक्स रेवेन्यू सरकार के लिए आय का मुख्य स्रोत है। वहीं नॉन-टैक्स रेवेन्यू स्थिर फैक्टर के रूप में काम करता है और इससे सरकार को विभिन्न स्रोतों से नियमित तौर पर आय होती रहती है।