Budget 2024: पिछले 5 वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU or Public Sector Undertakings) के शेयरों में शानदार तेजी देखी गई है। रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर और डिफेंस जैसे विकास क्षेत्रों में लगातार पूंजीगत व्यय किया गया है। एनालिस्ट्स का कहना है कि पीएसयू शेयरों में निकट भविष्य में तेजी रहेगी या नहीं, यह अंतरिम बजट 2024 (Interim Budget 2024) तय करेगा क्योंकि फैसला, सेक्टर्स के लिए सरकार के पूंजीगत व्यय अलोकेशन पर निर्भर करेगा। हालांकि एनालिस्ट्स ने निवेशकों को पीएसयू स्टॉक्स में पैसा लगाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी है।
इसकी वजह है कि कुछ शेयरों की वैल्यूएशन प्राइवेट सेक्टर के उनके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बहुत अधिक दिखती है। पिछले एक साल में हर 3 में से एक पीएसयू स्टॉक की कीमत दोगुने से अधिक हो गई है, जिससे बीएसई पीएसयू इंडेक्स 65 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान को उम्मीद है कि बजट में पूंजीगत खर्च की घोषणा के बाद पीएसयू स्टॉक्स में रैली बढ़ेगी लेकिन यह और ज्यादा स्टॉक स्पेसिफिक हो जाएगी।
प्राइवेटाइजेशनः निवेशकों का PSU में जगा भरोसा
भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद से सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। लेकिन अब तक केवल एयर इंडिया और नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड का ही निजीकरण (Privatisation) हो पाया है। अन्य रणनीतिक विनिवेशों के तहत सरकार, एक सार्वजनिक उपक्रम में अपनी पूरी हिस्सेदारी दूसरे को बेचने वाली है। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि चुनिंदा पीएसयू की स्थिति में गिरावट आई है, लेकिन इन्हें और अधिक प्रोफेशनल तरीके से चलाने के सरकार के प्रयासों के बीच इन कंपनियों में निवेशकों का नया विश्वास जगा है।
आईडीबीआई कैपिटल में रिसर्च हेड एके प्रभाकर ने कहा कि एनएचपीसी, एनएमडीसी, मझगांव डॉक, रेल विकास निगम, एनटीपीसी और इरकॉन इंटरनेशनल जैसे कई पीएसयू अब पहले की तुलना में अधिक कुशलता से चल रहे हैं। सभी पीएसयू कंपनियों में कर्मचारी लागत और दक्षता में सुधार हुआ है।
हालांकि कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि पीएसयू के प्राइवेटाइजेशन को लेकर बाजार की उम्मीदें काफी गलत हैं। पीएसयू के प्राइवेटाइजेशन पर सरकार की नीति, पिछली कोशिशों में दिखी व्यावहारिक दिक्कतों और पीएसयू की ऊंची कीमतों के कारण प्राइवेटाइजेशन को पीएसयू के लिए निवेश थीसिस बनाने को लेकर बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। अतीत में कई व्यावहारिक चुनौतियों ने सरकार के प्राइवेटाइजेशन के प्रयासों को बाधित किया है।
कॉनकॉर इस मामले में एक सटीक उदाहरण है। इसके प्राइवेटाइजेशन के लिए नवंबर 2019 में मंजूरी दी गई थी लेकिन यह अभी तक हुआ नहीं है। वजह सरकार को प्राइवेटाइजेशन को सक्षम करने के लिए पोर्ट-हिंटरलैंड लिंक ऑपरेटर और भारतीय रेलवे के बीच कई समझौतों पर फिर से काम करना पड़ा। बीपीसीएल में भी बिडर्स की ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखी। इसके अलावा सरकार चाहती है कि विनिवेश रणनीतिक हो। अंधाधुंध ओएफएस, पीएसयू शेयरों के मूल्य को कम कर सकते हैं।
क्या बजट में बढ़ेगा विनिवेश लक्ष्य?
रेटिंग एजेंसी इक्रा के विश्लेषकों के अनुसार, सरकार इस अंतरिम बजट में विनिवेश आय को 50000 करोड़ रुपये से कम रख सकती है। बाजार लेनदेन में शामिल अनिश्चितताओं को देखते हुए उच्च लक्ष्य के बजाय वित्त वर्ष 2025 के लिए 50000 करोड़ रुपये से कम का मध्यम लक्ष्य निर्धारित करना समझदारी होगी। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने पीएसयू विनिवेश से लगभग 10000 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि लक्ष्य 51000 करोड़ रुपये का है।
PSU के लिए अंतरिम बजट के पूंजीगत व्यय लेआउट से क्या उम्मीद?
सरकार के फिस्कल कंसोलिडेशन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण अंतरिम बजट में पूंजीगत व्यय में कुछ कमी देखी जा सकती है। निर्मल बंग के विश्लेषकों का अनुमान है कि कुल अलोकेशन में सड़कों और रेलवे की हिस्सेदारी अधिक रहेगी। सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए महामारी के बाद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दे रही है। 2020-21 के बाद से पूंजीगत व्यय अलोकेशन में लगातार वृद्धि देखी गई है। तीन वर्षों में पूंजीगत व्यय, बजट अनुमान से अधिक होने के कारण बाजार विशेषज्ञ पीएसयू शेयरों पर उत्साहित हैं। लेकिन साथ ही निवेशकों को राजनीतिक मोर्चे पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
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