Union Budget 2024: इलाज का खर्च घटाने के लिए देश में बढ़ेगा मेडिकल इक्विपमेंट का उत्पादन, बजट में आएगी बड़ी स्कीम

India Budget 2024: अभी कई मेडिकल इक्वपमेंट का आयात करना पड़ता है। सरकार मेडिकल इक्वपमेंट के आयात पर निर्भरता घटाना चाहती है। इससे इलाज के खर्च में कमी आएगी। 2022 में इंडिया में मेडिकल इक्विपमेंट का बाजार 11 अरब डॉलर का था। यह ग्लोबल मार्केट का 1.5 फीसदी है

अपडेटेड Jul 21, 2024 पर 9:50 PM
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Modi 3.0 Budget 2024: डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स का अनुमान है कि देश में मेडिकल इक्विपमेंट का मार्केट 2030 तक 16.4 फीसदी सीएजीआर से बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

देश में मेडिकल डिवाइसेज का उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में बड़ी स्कीम का ऐलान हो सकता है। यह फार्मा कंपनियों के लिए बनाई गई स्कीम जैसी हो सकती है। मिंट ने दो सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। मनीकंट्रोल इस खबर को स्वतंत्र रूप से वेरिफाय नहीं कर पाया है। दरअसल सरकार मेडिकल इक्वपमेंट के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहती है। इससे इलाज पर होने वाले खर्च को घटाने में मदद मिलेगी। अभी इस स्कीम के तहत वित्तीय सहायता पर फैसला नहीं हुआ है। लेकिन, सरकार इस स्कीम पर चर्चा कर रही है, जिसका ऐलान यूनियन बजट में हो सकता है।

मेडिकल इक्विपमेंट का बाजार 11 अरब डॉलर का

हेल्थ, केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स मिनिस्टर जेपी नड्डा ने पिछले महीने दवाओं और मिडिकल डिवाइसेज (Medical Devices) के उत्पादन के स्टैंडर्ड को अपग्रेड करने पर जोर दिया था। डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल्स फार्मा इंडस्ट्री के लिए नए सेगमेंट खासकर मेडिटेक सेक्टर पर विचार कर रहा है। भविष्य में ग्रोथ के लिए इसे अहम माना जा रहा है। 2022 में इंडिया में मेडिकल इक्विपमेंट का बाजार 11 अरब डॉलर का था। यह ग्लोबल मार्केट का 1.5 फीसदी है।


मेडिकल इक्विपमेंट के घरेलू उत्पादन से इलाज का खर्च घटेगा

डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स का अनुमान है कि देश में मेडिकल इक्विपमेंट का मार्केट 2030 तक 16.4 फीसदी सीएजीआर से बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। अभी देश में उत्पादित मेडिकल डिवाइसेज में कैथेटर्स और इंप्लांट्स जैसे डिवाइस शामिल हैं। नई स्कीम रिवैम्प्ड फार्मास्युटिकल्स टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन असिस्टेंस स्कीम (RPTUAS) जैसी हो सकती है। इस स्कीम के तहत फार्मा इंडस्ट्री को टेक्नोलॉजी को उन्नत बनाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। सरकार का यह कदम नेशनल मिडकल डिवाइसेज पॉलिसी के लिए भी अच्छा है, जिसका मकसद इंडिया को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।

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फार्मा एवं हेल्थकेयर सेक्टर के लिए 98461 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन

एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइसेज इंडस्ट्री के राजीव नाथ ने कहा कि इस स्ट्रेटेजिक एनिशिएटिव से मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल रेगुलेटरी एप्रूवल हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे क्वालिटी को लेकर इंडिया रेगुलेटर्स की साख बढ़ेगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर को 98,461 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन किया था।

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