बजट 2023: इन प्रोफेशनल्स के लिए ₹25 लाख तक बढ़ी टैक्स छूट की सीमा, छोटे उद्योगों को भी दी मिली राहत

बजट 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि छोटे उद्योगों के लिए टैक्स छूट की सीमा को अब 2 करोड़ के टर्नओवर से बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया है। वहीं कुछ खास प्रोफेशनल्स के लिए टैक्स छूट की सीमा को 50 लाख के टर्नओवर से बढ़ाकर 75 लाख कर दिया गया है

अपडेटेड Feb 01, 2023 पर 5:42 PM
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बजट 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार 1 फरवरी को संसद में भारत सरकार का आम बजट पेश किया

Union Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को बजट में अनुमानित टैक्सेशन (Presumptive Taxation) स्कीम के तहत छोटे उद्योगों और कुछ प्रोफेशनल्स के लिए लिए टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का ऐलान किया। इसका उद्देश्य नियमों के पालन से जुड़े बोझ को कम करने और कैश की जगह डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि छोटे उद्योगों के लिए टैक्स छूट की सीमा को अब 2 करोड़ के टर्नओवर से बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया है। वहीं कुछ खास प्रोफेशनल्स के लिए टैक्स छूट की सीमा को 50 लाख के टर्नओवर से बढ़ाकर 75 लाख कर दिया गया है।

अनुमानित टैक्सेशन स्कीम को संक्षेप में PTS भी कहते हैं। इस स्कीम के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स को अपने अपने अकाउंट्स का लेखा-जोखा नहीं रखना होता हैं। यह योजना छोटे टैक्सपेयर्स को राहत देती है, जिन्हें अपना खाता-बही मेंटेन करने में काफी दिक्कतें होती थी और उन्होंने इसके चलते अतिरिक्त लागत उठाना पड़ता था।

विभिन्न उद्योगों और प्रोफेशनल्स के आधार पर इस स्कीम को इनकम टैक्स एक्ट की तीन धाराओं में बांटा गया है- सेक्शन 44AD, 44ADA और 44AE।


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अभी तक सेक्शन 44AD के तहत, जिन प्रोफेशनल्स या उद्योगों का एक वित्त वर्ष में ग्रॉस टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से कम होता था, वे इस स्कीम का लाभ ले सकते है।

इसी तरह सेक्शन 44AA के तहत वे प्रोफेशनल्स या फर्म इस स्कीम का लाभ ले सकतें हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये से कम है। जबकि सेक्शन 44AE का लाभ वे प्रोफेशनल्स या छोटे उद्योग ले सकते हैं, जो मालवाहक वाहनों को चलाने या किराए पर देने के कारोबा में हैं।

बजट में वित्त मंत्री ने सेक्शन 44AD के तहत आने वाले छोटे उद्योगों के लिए अब टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया है। वहीं 44AE के तहत प्रोफेशनल्स के लिए सीमा को अब बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी एक शर्त के साथ है। इसके तहत इन उद्योगों का कैश रिसीविंग पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 5 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।

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