कोरोना की सबसे ज्यादा मार जिन सेक्टर पर पड़ी है, उनमें होटल इंडस्ट्री (Hotel Industry) भी शामिल है। 2020 और फिर 2021 की दूसरी लहर से यह इंडस्ट्री उबरने की कोशिश कर रही थी। लेकिन, ओमिक्रॉन ने फिर से इसकी मुश्किलें बढ़ा दी है। होटल इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को अपनी मुश्किलों के बारे में बताया है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि वित्त मंत्री 1 फरवरी को बजट (Budget 2022) में उनकी डिमांड्स पूरी कर सकती हैं।
होटल इंडस्ट्री ने कम ब्याज दरों पर लोन की सुविधा, प्रॉपर्टी टैक्स में कमी, लिकर लाइसेंस सहित दूसरे लाइसेंस शुल्क की दरों में कमी, कम पावर टैरिफ सहित कई रियायतें चाहती है। इंडस्ट्री का मानना है कि वित्त मंत्री बजट में उनकी डिमांड्स पूरी कर सकती हैं। इससे मुश्किल का सामना कर रही इस इंडस्ट्री को बहुत राहत मिलेगी। कम ब्याज दरों पर लोन की सुविधा होने पर होटल कंंपनियों को कारोबार के विस्तार में मदद मिलेगी।
होटल इंडस्ट्री ने 200 करोड़ रुपये से कम के होटल प्रोजक्ट्स को भी इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) का स्टेटस देने की मांग की है। अभी 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के होटल प्रोजेक्ट्स को इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री का स्टेटस हासिल है। लेकिन, होटल कंपनियां की दलील है कि छोटे होटल प्रोजेक्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा हासिल नहीं होने से सरकार की तरफ से मिलने वाली कई सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। अगर छोटे होटल प्रोजेक्ट्स को भी इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिल जाए तो उनकी कई मुश्किलें दूर हो जाएंगी।
हॉस्पिटलिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HAI) ने कहा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस हासिल होने से होटल कंपनियों को टैक्स के मामले में भी रियायत मिलेगी। एसोसिएशन ने कहा, "इस वक्त इंडस्ट्री को सरकार की मदद की जरूरत है। इस सेक्टर के सर्वाइवल के लिए सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है।" होटल इंडस्ट्री का देश की इकोनॉमी में बड़ा योगदान है। इस सेक्टर में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। देश की जीडीपी में इस सेक्टर का 9 फीसदी योगदान है।
होटल कंपनियों ने जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने और उनमें कमी करने की मांग वित्तमंत्री से की है। अभी 7,500 रुपये वन नाइट टैरिफ वाले रूम पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। 2,500 से 7,499 रुपये वन नाइट टैरिफ वाले रूम के लिए जीएसटी की दर 18 फीसदी है। एक ही प्रोडक्ट के लिए जीएसटी की अलग-अलग दरों से कंपलायंस में दिक्कत होती है। साथ ही इसके कैलकुलेशन में भी उलझन पैदा होती है। सरकार को होटल रूम की जीएसटी दरों को आसान बनाने की जरूरत है।