Union Budget 2023-24: केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से खेती-किसानी पर फोकस बढ़ा है। सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए कई कदम भी उठाए गए हैं। किसानों को सरकार की तरफ से सालाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन लगातार बढ़ाया है। इसका असर भी देखने को मिला है। कोरोना की महामारी का सबसे कम असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। इसलिए इस क्षेत्र को सरकार की मदद जरूरी है। एग्रीकल्चर सेक्टर की अच्छी ग्रोथ से करोड़ों लोगों को फायदा होता है। उम्मीद है कि सरकार यूनियन बजट (Union Budget) में कृषि क्षेत्र के लिए बड़े ऐलान करेंगी।
एग्री इनपुट्स पर जीएसटी घटाने से किसानों की आय बढ़ेगी
किसान काफी समय से खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाली चीजों पर जीएसटी घटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा होने से उनकी उत्पादन लागत घटेगी। इससे उनकी इनकम बढ़ेगी। हैंड पंप, वाटर पंप, खेती की मशीनें, कम्पोस्ट मशीनें, ट्रेलर आदि पर जीएसटी की 2.5% से 28% दर लागू हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार जीएसटी की दरों में कमी करने की उनकी मांग इस बजट में पूरी कर सकती है।
20-25 फीसदी बढ़ सकता है कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन
फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने 1.40 लाख करोड़ रुपये का आबंटन किया था। यह फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के 1.24 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से ज्यादा था। माना जा रहा है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन में 20-25 फीसदी का इजाफा कर सकती है।
ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत
देश में बिजली के कुल इस्तेमाल का करीब 20% कृषि क्षेत्र में होता है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने से उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। खेती से जुड़े कामों के लिए सरकार हाइड्रो-इलेक्ट्रिक, विंड पावर, सोलर एनर्जी जैसी ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने का उपाय कर सकती है। किसानों को इसके लिए इनसेंटिव का ऐलान वित्त मंत्री बजट में कर सकती है।
कृषि मंत्रालय के दायरे में आने वाल उत्पादों की लिस्ट बढ़ाई जाए
चाय, कॉफी, मसाले आदि को भी कृषि मंत्रालय के दायरे में लाने की जरूरत है । फिलहाल ये उत्पाद कॉमर्स मिनिस्ट्री के अंतर्गत आते हैं । कृषि मंत्रालय के तहत आने से कृषि संबंधी नीतियों का लाभ इन उत्पादकों को भी मिलने लगेगा। इससे इन उप्तादों का निर्यात बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने से किसानों को होगा फायदा
सीमांत किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने की जरूरत है। अभी सीमांत किसानों को क्रेडिट कार्ड पर 10,000 से 50,000 रुपये तक का कर्ज बहुत कम इंटरेस्ट रेट पर मिलता है। किसान इस पैसे का इस्तेमाल बीज, खाद आदि पर करते हैं। पिछले कुछ सालों में एग्री इनपुट्स खासकर उर्वरकों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। इसलिए किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने से किसान ज्यादा कर्ज ले सकेंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही किसानों की आय भी बढ़ेगी।
(पारिजात सिन्हा आर्थिक-सामाजिक-राजनीतिक मामलों के विश्लेषक हैं । वे लेखक एवं मैनेजमेंट व लॉ कंसल्टेंट हैं।)